शास्त्रोंमें उल्लेख है कि गौ सेवासे मनुष्यको धन, संतान और दीर्घायु प्राप्त होती हैं । गाय जब संतुष्ट होती है तो वह समस्त पाप-तापों को दूर करती है । दान में दिये जानेपर वह अक्षय स्वर्ग लोकको प्राप्त कराती है; अत: गोधन ही वास्तव में सच्चा धन है । गौ सेवासे ही भगवान श्री कृष्णको भगवता, महर्षि गौतम, कपिल, च्यवन सौभरि तथा आपस्तम्ब आदिको परम सिद्धि प्राप्त हुई । महाराजा दिलीपको रघु जैसे चक्रवर्ती पुत्रकी प्राप्ति हुई । जैन धर्म के प्रथम तीर्थकर भगवान आदीनाथको ऋषभ भी कहते हैं जिनका सूचक बैल; ऋषभ द्ध है । वेद-शास्त्र स्मृतियां, पुराण तथा इतिहास गौकी महिमासे ओत-प्रोत है । और यहां तककी स्वयं वेद, गायको नमन करता है ।
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