* अजीर्ण : यदि प्रातःकाल अजीर्णकी (रात्रिका भोजन न पचनेकी) शंका हो तो हरड, सोंठ तथा सैन्धव लवणका चूर्ण, जलके साथ चम्मच खा लें और दोपहर अथवा सांयकाल थोडा भोजन कर लें !
* अरुचि :
– सोंठ और पित्तपापडाका पाक ज्वरनाशक, अग्नि प्रदीप्त करनेवाला, तृष्णा तथा भोजनकी अरुचिको शान्त करनेवाला है । इसे ५ से १० ग्रामकी मात्रामें नित्य सेवन कराएं !
– सौंठ, चिरायता, नागरमोथा, गुरोचनका चूर्ण भी ज्वर नाशक एवं अग्नि प्रदीप्त करनेवाला, तृष्णा एवं भोजनकी अरूचिको शान्त करनेवाला होता है ।
* उदररोग : सोंठ, हरीतकी, बहेडा, आंवला, इनको समभागमें लेकर कल्क बना लें ! देशी गायका घी तथा तिलका तेल ढाई किलोग्राम, दहीका पानी ढाई किलोग्राम, इन सबको मिलाकर विधिपूर्वक घीका पाक बनाएं ! पाक बन जानेपर, छानकर रख लें ! इस घृतका १० से २० ग्रामकी मात्रामें प्रातः एवं सायं पान करनेसे सभी प्रकारके उदररोगोंका नाश होता है तथा मलावरोध (कब्ज), वातज एवं गुल्मरोगमें भी इसका प्रयोग होता है ।
* मन्दाग्नि
– अजवाइन, सेन्धा ‘नमक’, हरड, सोंठ, इनके चूर्णको समपरिमाणमें एकत्रित कर लें ! मात्रा २५० मि.ग्रा. से ५०० मि.ग्रा.तक । यह चूर्ण शूलको नष्ट करता है तथा मन्दाग्निको प्रदीप्त करता है ।
– इसके २० ग्राम रसमें, समभाग नींबूका रस मिलाकर पिलानेसे मन्दाग्नि दूर होती है ।
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