बथुएको विशेष रूपसे आप और हम ‘खरपतवार’के (Weed) रूपमें जानते हैं, और हममेंसे बहुतसे लोग बथुएके लाभ जाने बिना ही इसे नष्ट भी कर देते हैं । सम्भवतः उन लोगोंको यह पता नहीं होता कि बथुआ (Bathua) बहुतसे स्वास्थ्य लाभोंसे भरा हुआ है और भारतमें एक स्वस्थ शाकके (सब्जीके) रूपमें प्रसिद्ध है । बथुएको वैज्ञानिक रूपसे ‘चेनोपोडियम अल्बम’के नामसे जाना जाता है । यह एक वार्षिक खरपतवार पौधा है, जो खेतोंमें फसलोंके साथ-साथ बढता है । यह भारतीय खरपतवारोंकी सबसे व्यापक रूपसे फैलनेवाली प्रजातियोंमेंसे एक है । पूर्व समयसे ही बथुएकी पत्तियों और बीजोंका उपयोग खानेके लिए किया जा रहा है ।
बथुएको भारतमें पत्तेदार तरकारीके रूपमें उबालकर उपयोग किया जाता है । भारतमें पकाए जानेवाले अन्य व्यंजनोंमें जैसे रायता, परांठामें भी इसका उपयोग किया जाता है । साथ ही बथुएके बीज भी स्वास्थ्यके लिए बहुत ही लाभदायक होते हैं । ये बीज ‘एमिनो एसिड’से भरे होते हैं ।
बथुएके बीज : ये बीज अत्यधिक पौष्टिक होते हैं, जो बथुआ पौधेका खाने योग्य प्रमुख भाग होता है । गेंहू, मक्का और चावलकी भांति भारतमें इसके बीजोंका उपयोग किया जाता है, जोकि बहुत ही पौष्टिक होते हैं; किन्तु अधिकांश लोगोंको बथुएके लाभ पता नहीं है । वे लोग बथुएका उपयोग अपने पशुओंके चारेके रूपमें करते हैं ।
शिमलामें लोगोंकेद्वारा बथुएके बीजसे एक किण्वित पेय बनाते हैं, जिसे सोरा कहा जाता है । बथुएके बीज आंतोंके परजीवीको (Intestinal Parasites) मारनेमें भी सहायता करते हैं, साथ ही मलावरोधकी (कब्जकी) समस्यासे भी मुक्ति दिलाते हैं ।
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