बथुआ खानेके लाभ वृक्कके (गुर्देके) लिए :‘गुर्दे’की विफलताके (kidney failure) फलस्वरूप शरीरमें रक्तकी आपूर्ति और मूत्रके उचित प्रवाहमें बाधा हो सकती है । जिससे शरीर दुर्बल हो सकता है । बथुएका सेवन ‘गुर्दे’की पत्थरीसे छुटकारा पाने और यूटीआई (UTI) जैसे मूत्रपथके संक्रमणके उपचारमें भी सहायता कर सकता है ।
मधुमेहके लिए बथुआ सागके लाभ : विश्वभरके लिए मधुमेह (Diabetes) आज एक सामान्य रोग बन चुका है । यह मधुमेहके प्रभावको भी न्यून कर सकता है । बथुएकी पत्तियां शरीरमें रक्त शर्कराके स्तरको (Sugar Levels) न्यून करनेमें सहायता करती हैं । इस प्रकार यह मधुमेह और इससे सम्बन्धित विभिन्न प्रकारकी समस्याओंको भी दूर कर सकती है । इसके औषधीय गुण होनेके पश्चात भी आपको यही परामर्श दिया जाता है कि मधुमेहके लिए इसका सेवन करनेसे पहले अपने चिकित्सकसे सम्पर्क करें; क्योंकि मधुमेह रोगियोंको भोजन और औषधियोंकी सन्तुलित मात्राका सेवन करना चाहिए ।
मधुमेहके लिए आप बथुएके पत्तोंका रस निकाल कर इसका सेवन कर सकते हैं । इसे और अधिक प्रभावी बनानेके लिए आप इसमें नीम्बूके रसकी थोडीसी मात्रा मिलाकर नियमित रूपसे प्रातः और संध्या इसका सेवन करें !
बथुएका उपयोग अतिसारके (दस्तके) उपचारमें : विकासशील देशोंमें ‘दस्त’ एक सामान्य रूपसे फैलनेवाली महामारी होती है, जिसके परिणामस्वरूप पहले कई बच्चोंकी मृत्यु हो चुकी है । मलावरोध (कब्ज) और ‘बवासीर’के उपचारके साथ-साथ बथुआ ‘दस्त’का भी प्रभावी रूपसे उपचार कर सकता है । ‘दस्त’ होनेके मध्य बथुएके पत्तोंको उबालकर प्रतिदिन दो बार सेवन किया जाता है तो यह श्रेष्ठ परिणाम देता है । यदि आप बथुएका उपयोग औषधिके विकल्पके रूपमें नियमितरूपसे करते हैं, तो यह आपकी ‘दस्त’की समस्याको शीघ्र दूर करनेमें सहायता करता है ।
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