घरका वैद्य – चमेली पुष्प (भाग – २)


रक्तपित्तके रोगमें : परवल, श्लेष्मातक, चौपतिया, चमेली, वटके अंकुर तथा निर्गुण्डी पत्तेके सागको घीसे बनाकर तथा आंवला व दाडिम (अनार) रस मिलाकर सेवन करनेसे रक्तपित्तमें लाभ होता है ।
क्षतक्षीण (कटना-छिलना) : चमेलीके पुष्पोंको पीसकर उसमें मिश्री मिलाकर सेवन करनेसे क्षतक्षीण अर्थात सामान्य कटने व छिलनेपर घावको ठीक करनेमें लाभ होता है ।
पथरीमें लाभप्रद : वृक्कके (गुर्देके) पत्‍थर होना किसी व्‍यक्तिके लिए गम्भीर समस्‍या हो सकती है; परन्तु अध्‍ययन बताते हैं कि पथरीका उपचार करनेके लिए चमेलीके पुष्पोंका उपयोग किया जा सकता है; क्‍योंकि चमेलीके पुष्पमें ‘एंटीलिथिएटिक’ (जो पथरी निर्माण होनेसे रोकते हैं) गुण होते हैं । ये गुण पथरीका गठन होनेसे रोकते हैं ।
रोग प्रतिरक्षामें : यदि शरीर बार-बार संक्रमण और सामान्‍य रोगोंसे ग्रसित हो जाता है तो चमेलीके पुष्पका उपयोग करें ! अध्‍ययनसे ज्ञात हुआ है कि चमेलीके पुष्पसे बनी ‘चाय’का सेवन रोग प्रतिरोधक क्षमताको बढानेमें सहायक होता है । ऐसा इसलिए है; क्‍योंकि चमेलीके पुष्पमें सक्रिय घटकके रूपमें ‘लिनालूल’, ‘बेंजोइक एसीटेट’, ‘इंडोल’, ‘सैलिसिलिक एसिड’ और ‘अल्‍कॉइड’ होते हैं । नियमित रूपसे चमेलीके पुष्पकी ‘चाय’का सेवन सामान्‍य शीतप्रकोप और ज्वरमें लाभ देता है ।
‘ट्यूमर’में लाभप्रद : अध्‍ययनोंसे ज्ञात हुआ है कि चमेलीके पुष्पमें ‘एंटी-ट्यूमर’ गुण होते हैं, जो शरीरमें विद्यमान ‘ट्यूमर” कोशिकाओंके विकासको रोकने और इन्‍हें नष्‍ट करनेमें सहायक होता है ।
विश्रान्तिमें लाभप्रद : चमेलीके पुष्पकी सुगन्ध धमनियोंको (नसोंको) शान्त करनेमें महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे शरीरको विश्रान्ति (आराम) मिलती है । इसके लिए चमेलीके पुष्पसे प्राप्‍त तेलको नारियलके तेलमें मिलाकर शरीरपर मर्दन (मालिश) करें, जिससे यह वेदनामें (दर्दमें) लाभ देता है । इस तेलकी सुगन्ध मनको शान्तकर तनावसे मुक्ति दिलानेमें सहायक है ।
केशके लिए लाभप्रद : केशको प्राकृतिक ‘कंडीशन’ करनेके लिए उष्ण जलमें चमेलीके पुष्पोंको डाल दें और कुछ समय पश्चात जलसे पुष्पोंको निकाल लें और ठण्डा होने दें ! इस ठण्डे जलसे बालोंको धो लें ! इस जलसे बालोंको धोनेके पश्चात सामान्‍य जलसे बालोंको न धोएं ! बालोंमें चमक लानेके लिए जलमें चमेलीके तेलकी कुछ बूंदें भी मिलाई जा सकती हैं ।
सावधानियां :
१. गर्भवती या शिशुको स्तनपान करा रही महिलाएं इसका प्रयोग न करें !
२. आधासीसीसे (माइग्रेनसे) पीडित व्यक्ति चमेलीके तेलका प्रयोग न करें !


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