थकान दूर करे चनेका सेवन : दैनिक कार्योंके मध्य थकान अनुभव होती है तो काले चनेका सेवन इसके लिए लाभदायक हो सकता है; क्योंकि आयुर्वेदके अनुसार इसमें बल्यका गुण पाया जाता है, जिसके कारण चना शरीरको तुरन्त ऊर्जा प्रदानकर निष्क्रियता और थकानको दूर करनेमें सहायता करता है ।
‘एनिमिया’से सुरक्षाके लिए काले चने : काले चनेका सेवन ‘एनीमिया’से रक्षा करनेमें सहायक होता है, क्योंकि चनेमें ‘आयरन’की प्रचुर मात्रा पाई जाती है, जो ‘हीमोग्लोबिन’को बढानेमें सहायता करती है और ‘एनीमिया’से बचाव करनेमें सहायता करती है ।
चनेके बीजमें छिपा है पुरुषत्वका भेद : विशेषकर चना दूसरी दालोंके अनुपातमें अल्पमूल्य (सस्ता) होता है और स्वास्थ्यके लिए भी यह दूसरी दालोंसे अधिक पौष्टिक आहार है । मिट्टीके बर्तनमें रातको चने भिगोकर रख दें ! सवेरे उठकर अच्छी प्रकारसे चबा-चबाकर खाएं ! इसके निरन्तर सेवन करनेसे वीर्यमें वृद्धि होती है व पुरुषोंकी दुर्बलतासे जुडी हुई समस्याएं समाप्त हो जाती हैं । भीगे हुए चने खाकर दूध पीते रहनेसे भी वीर्यका पतलापन दूर हो जाता है ।
चना खानेसे हानियां : चनेसे बने बेसनका प्रयोग शीतपित्त, श्वित्र, मोटापा एवं अर्शमें (पाइल्स) लेना वर्जित होता है । इसके बीजोंका प्रयोग पाण्डुरोगमें (पीलियामें) लाभकारी होता है । इस प्रकारकी हानिसे बचनेके लिए, इसको सन्तुलित मात्रामें खाना अच्छा होता है ।
दिनके समय रिक्त पेट, भीगे चने खानेका परामर्श विशेषकर खिलाडियों और व्यायाम करनेवालोंको क्यों दिया जाता है; क्योंकी अङ्कुरित आहारमें चनेको विशेष महत्त्व दिया गया है । छोटासा दिखनेवाला चना ‘प्रोटीन’ और ‘फाइबर’से युक्त होता है । साथ ही इसे ‘कैल्शियम’ और ‘फास्फोरस’का भी अच्छा स्रोत माना गया है । यह पाचन तन्त्रको सक्षम करनेके साथ-साथ ‘इम्यूनिटी’को बढाने और ‘मेटाबॉलिज्म’को उत्तेजित करनेका कार्य करता है । साथ ही मांसपेशियोंकी क्षमतामें भी सुधार करता है ।
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