घरका वैद्य – चना (भाग-३)


रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) : शरीरमें रक्त-शर्कराको नियन्त्रित करनेमें चना विशेष भूमिका निभा सकता है । एक शोधके अनुसार, चना शरीरमें अतिरिक्त रक्त-शर्कराको दबानेका कार्य कर सकता है । मधुमेहका एक कारण अधिक भूख लगना भी है और चना भूखको कम करनेका कार्य कर सकता है । इसके पीछे ‘लो-ग्लाइसेमिक इंडेक्स’ (रक्त शर्कराके स्तरपर ‘कार्बोहाइड्रेट’का प्रभाव), ‘फाइबर’ व ‘प्रोटीन’ जैसे पोषक तत्त्वोंका होना है ।

मधुमेहपर नियन्त्रण करनेमें : वर्तमानकी भागदौड और तनाव भरा जीवन ऐसा हो गया है कि न खानेका नियम और न ही सोनेका । परिणाम यह होता है कि लोग मधुमेहसे ग्रस्त होते जा रहे हैं । ऐसेमें ५ ग्राम चनेके पत्तेका चूर्ण खानेसे मधुमेहमें लाभ होता है ।

पाचन तन्त्रके लिए : पाचन क्रियाके लिए भी चनेके लाभ बहुत हैं । इसमें ‘फाइबर’की मात्रा अधिक होती है । इसलिए चना पेट सम्बन्धी समस्याओं, जैसे वात (गैस), मलावरोध (कब्ज), ‘डायरिया’ व कठोर मल आदिको ठीककर, स्वस्थ पाचनको बढावा देता है । एक विवरणके अनुसार ‘फाइबर’ मलावरोध जैसी स्थितियोंके अतिरिक्त ‘कोल्न कैंसर’के सङ्कटको भी न्यून कर सकता है । पाचनके लिए अङ्कुरित चनेके भी कई लाभ हैं । प्रति दिवस अङ्कुरित चने खानेसे भी पाचन क्रिया नियन्त्रणमें रहती है ।

पाचन शक्ति बढानेके लिए भुना चना खाना लाभदायक : पाचन शक्ति अच्छी रखनी है तो ‘लीवर’को स्वस्थ रखनेकी आवश्यकता है । इसके लिए आप चनेका सेवन कर सकते है; क्योंकि भुना हुआ चना ‘लीवर’के लिए लाभदायक होता है, इसलिए यह पाचन शक्तिपर नियन्त्रण रखनेमें सहायता करता है ।



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