बाल झडनेकी समस्याके लिए : देखा गया है कि ‘प्रोटीन’के अभावमें बाल पतले होकर झडने लगते हैं । चनेको ‘जिंक’, ‘प्रोटीन’ और ‘आयरन’से समृद्ध माना गया है, इसलिए यह बाल झडनेकी समस्यासे भी मुक्ति दिला सकता हैं । चनेमें ‘विटामिन-ए’, ‘बी’, और ‘ई’ नामक विटामिन भी प्रचुरतासे होते हैं, जो ‘स्कैल्प’ और बालोंको स्वस्थ रखनेका कार्य करते हैं ।
खांसीसे दिलाए छुटकारा भुना चना : यदि वातावरणके परिवर्तनके कारण सूखी खांसीका कष्ट है और खांसी कम होनेका नाम ही नहीं ले रही, तो भुने हुए चनेसे इसका उपचार किया जा सकता है ।
रातको सोते समय थोडासा भुना चना और गुड खा लें ! इससे खांसीमें लाभ होता है । इसके अतिरिक्त रातमें सोते समय थोडेसे भुने हुए चनेके साथ, ‘गर्म’ दूध पीनेसे श्वासनलीसे सम्बन्धित रोगोंसे छुटकारा मिलता है ।
हिचकीसे दिलाए मुक्ति : चनेकी भूसीको हुक्केमें रखकर, उसके धूम्रका सेवन करनेसे हिचकी बन्द हो जाती है ।
वमनसे (उल्टीसे) छुटकारा : यदि मसालेवाले खाद्य पदार्थ खानेसे या किसी रोगके प्रभावसे वमन (उल्टी) हो रही है तो चनेका सेवन इस प्रकारसे करनेपर लाभ मिलता है । चनेको छह गुणा जलमें भिगोकर, दूसरे दिवस प्रातः उसका जल छानकर २० मि.ली. मात्रामें पीनेसे वमन (उल्टी) रुक जाता है ।
पेट सम्बन्धी समस्याके लिए चना : प्रायः मसालेवाला भोजन खाने या असमय भोजनसे पेटमें ‘गैस’ उत्पन्न हो जानेपर, उदर पीडाकी समस्या होने लगती है । चनेको आगपर भूनकर खानेसे क्रूरकोष्ठसे (जिनको कठिनतासे मल निकलता है) छुटकारा मिलता है, जिससे उदर-पीडा न्यून हो जाती है ।
उदर व्रणसे (पेप्टिकअल्सरसे) छुटकारा : परवलके पत्तोंसे बने रसके (जूसके) साथ, चनेसे बने सत्तूका सेवन करनेसे अन्नद्रवशूल या ‘पेप्टिक अल्सर’में लाभ होता है ।
अतिसार (दस्त या पेचिश) रोके चना : पौधेसे निकलनेवाले अम्लीय निर्यास या निचोडका सेवन करनेसे भूख न लगना, अतिसार तथा पेचिश (Dysperpsia) आदि रोगोंमें लाभ होता है ।
अश्मरीके लिए चनेसे लाभ : आजकलके प्रदूषित खाद्य पदार्थ, बन्द डिब्बेके खाने और असन्तुलित आहारके सेवनके कारण पथरीकी समस्या होती है । ‘किडनी’में पत्थरके कारण जो कष्ट होता है, चना उससे मुक्ति दिलानेमें सहायता करता है। चनेका शीत-कषाय बनाकर २०-२० मि.ली. मात्रामें पिलानेसे मूत्र मार्गकी पथरीके कारण, जो कष्ट होता है, उससे छुटकारा दिलाता है । ‘अश्मरी’से चैन पानेके लिए चना खानेसे लाभ मिलता है ।
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