घरका वैद्य – क्रिस्टल चिकित्सा (भाग-२)


कुल सात चक्र हैं, मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्ध, आज्ञा व सहस्रार । चक्र प्रणालीको सन्तुलित करनेमें ‘क्रिस्टल’के साथ ‘रेकी’ या प्राणशक्ति प्रणाली चिकित्सा अत्यन्त सहायक है । यह प्रत्येक क्षेत्रपर उपयुक्त रंगका एक पत्थर रखकर किया जा सकता है । प्रत्येक चक्रको अपनी ऊर्जा और पूरे शरीरके समग्र सद्भावमें परिवर्तनके बिना अपने कम्पनसे मेल खानेवाली ऊर्जाको बढावा मिलेगा । चक्र और ‘क्रिस्टल’के मध्य समन्वय स्वस्थ कम्पन प्रदान करता है और प्रभावित शरीरके भागको ठीक करता है । सात चक्रोंके लिए विभिन्न प्रकारके पत्थर प्रासङ्गिक हैं । इसके लिए प्रत्येक चक्रपर एक लाभकारी पत्थर लगानेकी आवश्यकता है और यह पूरे शारीरिक तन्त्रको सशक्त करता है । साथ ही यह चक्रोंकी शुद्धिकर उन्हें सन्तुलित करनेमें भी सहायक सिद्ध होता है । इस हेतु मूलाधारसे आरम्भकर अगले-अगले चक्रकी ओर बढ सकते हैं और सभी आवश्यक पत्थरोंको प्राप्त करनेके लिए चक्र उपचार संच एकत्र कर सकते हैं ।

मूलाधार चक्र : इस चक्रके लिए, एक लाल पत्थर चुनें और इसे रीढके आधारके पास रखें और दो समान लाल पत्थर भी चुनें और प्रत्येक पांवके शीर्षपर रखें !
स्वाधिष्ठान चक्र : इसके लिए नारंगी रंगका पत्थर सबसे अच्छा होगा और इसे निचले पेडूपर (पेटपर) रखा जाना चाहिए ।
मणिपुर चक्र : इस चक्रकी लिए एक पीले रंगका पत्थर चुनें और नाभिपर रखें !
अनाहत चक्र : हरे रंगका पत्थर छातीके केन्द्रमें रखना उत्तम होता है और भावनात्मक समाशोधनके लिए एक अतिरिक्त पाटलवर्णी (गुलाबी) जोडा जा सकता है ।
विशुद्ध चक्र : हलके नीले पत्थर गलेके आधारपर रखना ठीक रहता है ।
आज्ञा चक्र : गहरे नीले या ‘इंडिगो’ रंगका पत्थर भौंह चक्रको सन्तुलित करनेके लिए उपयोगी सिद्ध होता है और इसे माथेके केन्द्रमें रखा जाना चाहिए ।
सहस्रार चक्र : इस चक्रपर अर्थात शीशपर नीले, बैंगनी या पारदर्शी पत्थरका उपयोग करें !
आप कुछ सरल चरणोंका पालन करके आरम्भ कर सकते हैं :
* सबसे पहले अपने ‘क्रिस्टल’को सीधे ‘चांदनी’के नीचे भूमिपर रखकर स्वच्छ करें और यह सर्वोत्तम परिणामोंके लिए पूर्णिमाकी रात होनी चाहिए । सूर्यके प्रकाशसे पहले उन्हें वहां से हटा लें ! सूर्यके प्रकाशके अधिक सम्पर्कसे उसकी उपचार क्षमता न्यून हो सकती है ।
* सर्वोत्तम परिणामोंके लिए ऊपर वर्णित प्रत्येक चक्रके लिए उपयुक्त ‘क्रिस्टल’ चुनें !
* चक्रोंपर ‘क्रिस्टल’ रखनेसे पूर्व, ‘रेकी’ या प्राणशक्ति उपचार प्रणालीसे योग्य चक्रका चुनावकर, जिस चक्रपर अधिक उपचारकी आवश्यकता है, उसपर क्रिस्टल रखें !
* प्रत्येक चक्र सत्रके पश्चात सभी ‘क्रिस्टल’ सूक्ष्मसे प्रार्थनाकर स्वच्छ करें !



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