घरका वैद्य – दुग्ध चिकित्सा (भाग-२)
धारोष्ण दूध : धारोष्ण दूध वह होता हैं, जो स्तनोंसे तुरन्त निकाला गया दूध होता हैं । धारोष्ण दूध अत्यन्त उपयोगी होता है । सामान्य दूधको वायु, पृथ्वी, अग्नि और आकाशका स्पर्श होता है । थोडी देर पश्चात ऐसे दूधको पीनेसे दूधके अधिकांश गुण नष्ट हो जाते हैं । दूध निकालते ही तुरन्त पी लिया जाए, तो वह अति उत्तम होता है । कुछ लोग इस दूधको पचा नहीं पाते हैं; तथापि इसे उत्तम दूध कहा जाता है । जैसे मां बच्चेको दुग्धपान कराती है तो वहां वायुका भी स्पर्श दूधको नहीं होता हैं । जिस प्रकार बच्चा तत्काल दूध पीता है, हम उसी दूधकी बातकर रहे हैं । नियम यह है कि दूध पिलानेवाले और दूध पीनेवालेके शरीरका तापमान समान होना चाहिए । छोटे बच्चेके लिए मांका दूध इसलिए सर्वोत्तम आहार कहा गया है; क्योंकि बच्चे दूधको मांके स्तनमें मुंह लगाकर बिना वायु लगाए प्राकृतिक रूपसे ग्रहण करते हैं । वैसे ही गायका दूध निकालकर तुरन्त पीनेसे वह अत्यधिक प्रभावशाली होता है । दूधके वायुसे सम्पर्कमें आनेपर कुछ समय पश्चात ही उसमें ‘बैक्टीरिया’ आ जाते हैं ।
दुग्ध कल्प : प्राकृतिक चिकित्सामें अधिकांशतः देशी गाय जो शुद्ध प्राकृतिक आहार ग्रहण करती है, उसके दूधसे कल्प कराया जाता है । हृदयसे सम्बन्धित कुछ रोगोंको छोडकर कोई भी रोग ऐसा नहीं है, जो दुग्ध कल्पसे न मिट सके; परन्तु यह कल्प किसी प्राकृतिक चिकित्सालयमें रहकर चिकित्सककी देखरेखमें ही करना चाहिए ।
गायके दूध, दही, घी इसके कुछ अनुभूत घरेलू उपयोगमें निम्नलिखित हैं :
दुग्ध कल्पके चिकित्सीय प्रभाव :
मुखकी सुन्दरताके लिए : दस ग्राम मसूरकी दाल, दस ग्राम हलदी, दस ग्राम बेसनको रातमें ६० मिलीलीटर कच्चे दूधमें भिगो दीजिए । प्रातःकाल इन सबको पीसकर उसमें थोडा मधु मिलाकर उबटनकी भांति लगाकर थोडी देर सूखने दें और उसके पश्चात उसे रगडकर हलके हाथोंसे छुडाकर स्नान कर लें । इसके प्रयोगसे मुहांसे, चेचकके दाग, स्त्रियोंके मुखके अनावश्यक बाल और झाइयां आदि नष्ट हो जाते हैं और यह घरपर सरलतासे कोई भी कर सकता है ।
चर्मरोग (एक्जिमा) : यदि किसीको ‘एक्जिमा’ है तो रुईकी पट्टीको दो तीन तहकरके गायके कच्चे दूधमें भिगोनेके पश्चात इसे ‘एक्जिमा’युक्त स्थानपर दस मिनिटतक रख दीजिए । लगभग एक सप्ताहके भीतर ‘एक्जिमा’की खुजली समाप्त हो जाएगी । खुजली समाप्त होनेके पश्चात ‘एक्जिमा’पर गायका मक्खन मलकर लगानेसे कुछ दिनोंमें ‘एक्जिमा’ समाप्त हो जाता हैं ।
केशके लिए : गायके दहीको ताम्बेके बर्तनमें डालकर उसे तबतक घोंटें, जबतक दहीमें हरापन न आ जाए । इस दहीको सिरपर लेप लगाकर आधे घण्टेके लिए छोड दीजिए । साबुनका उपयोग न करें ! इससे बालोंके रोग दूर हो जाएंगे और गंजेपनमें भी लाभ होगा । एक दिन पुराने मट्ठेसे बाल धोनेसे बाल झडनातक बन्द हो जाते हैं ।
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