घरका वैद्य – जल तत्त्वद्वारा प्राकृतिक चिकित्सा (भाग-५)


ताम्र जलके लाभ
पिछले अंकमें हम जल तत्त्वके विषयमें आवश्यक जानकारी प्राप्त कर ही चुके हैं, इस अंकमें हम इस ताम्र जलको ग्रहण करनेसे स्वास्थ्य लाभके साथ ही कुछ रोगोंके निवारणमें कैसे सहायता मिल सकती है ?, यह जानेंगे !
मानव सभ्यताके इतिहासमें ताम्बेका एक प्रमुख स्थान है; क्योंकि प्राचीन कालमें मानवद्वारा सबसे पहले प्रयुक्त धातुओं और मिश्रधातुओंमें ताम्बा और कांसेका (जो कि ताम्बे और जस्तेसे मिलकर बनता है) नाम आता है ।
ताम्बेके पात्रोंमें रखे जल अर्थात ताम्र जलको पीनेकी परम्परा हमारे देशमें पुरातन कालसे चली आ रही है । इसके पीछे वैज्ञानिक आधार भी है । आयुर्वेद अनुसार यदि आठ घण्टे ताम्बेके पात्रमें रखा हुआ जल प्रातः खाली पेट पिया जाए, तो यह स्वास्थ्यके लिए उत्तम होता है । इससे तीनों दोषोंसे (वात, पित्त और कफसे) सम्बन्धित कष्ट न्यून हो जाते हैं; क्योंकि ताम्बा जलको धनात्मक विद्युतसे आवेशित (Positively Charged) कर देता है और शरीरके इन तीनों दोषोंको सन्तुलित करता है । मात्र यह ध्यान रखना चाहिए कि न्यूनतम ८ घण्टे जलको ताम्र पात्रमें रखनेके पश्चात ही उसे पीना चाहिए । विशेष बात यह है कि ताम्बेके पात्रमें रखा जल हम लम्बे समयतक उपयोग कर सकते है; क्योंकि इससे कोई अशुद्धि और बासीपन नहीं आता । मात्र यह ध्यान रखना चाहिए कि यदि हमारा शरीर ताम्बा सहज रूपसे ग्रहण नहीं कर पाता है तो इसका अत्यधिक प्रयोग हानिकारक हो सकता है । खाद्य एवं औषधि नियन्त्रक संस्थाके (फूड एण्ड ड्रग एडनिस्ट्रेशन FDA) अनुसार १२ मिली ग्राम प्रतिदिन ताम्बेकी मात्रा हमारे शरीरके लिए पर्याप्त है; अतः दिनमें २ से ३ बार ताम्र जलका सेवन शरीर और स्वास्थ्यके लिए उपयुक्त है । ताम्र पात्रको अधिक खुरदुरे पदार्थसे रगडकर स्वच्छ नहीं करना चाहिए; अन्यथा ताम्बेकी मात्रामें क्षरण होगा और शीघ्र ही पात्रसे ताम्बा लुप्त हो जाएगा । इस हेतु आप नींबूका उपयोग कर सकते है । नींबूका एक टुकडा लेकर, इसे ठीकसे पात्रमें निचोडकर कुछ देरके लिए छोड दें, तत्पश्चात पुनः स्वच्छ जलसे इसे धो ले । खानेका सोडा, एक दूसरा विकल्प है, आप इसका भी प्रयोग कर सकते है ।


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