घरका वैद्य – जायफल (भाग-२)
६. शीत प्रकोप (सर्दी-जुकाम) :
★ जायफलको जलमें घिसकर लेप बना लें ! इस लेपको नाकपर, नथुनोंपर और छातीपर मलनेसे शीघ्र लाभ मिलेगा । जायफलका चूर्ण और सोंठके चूर्णको समान मात्रामें मिलाकर एक चौथाई चम्मच २ बार खिलाएं ! इससे ‘सर्दी और जुकाम’का रोग दूर हो जाता है ।
★ जायफलका पिसा हुआ चूर्ण, एक चुटकीकी मात्रामें लेकर दूधमें मिलाकर देनेसे ‘सर्दी’का प्रभाव न्यून हो जाता है । इसे सेवन करनेसे ठण्ड नहीं लगती है ।
७. मुंहासे : कच्चे दूधमें जायफल घिसकर, प्रतिदिन प्रातः और रात्रिमें पूरे चहरेपर लगाएं ! इससे मुंहासोंके अतिरिक्त मुखके काले धब्बे भी नष्ट होंगे और मुखपर निखार आएगा ।
८. गैस, मलबन्धका (कब्जका) कष्ट : नींबूके रसमें जायफल घिसकर २ चम्मचकी मात्रामें सवेरे-संध्या, भोजनके पश्चात सेवन करनेसे गैस तथा मलावरोधका (कब्जका) कष्ट दूर होगा ।
९. मुखकी दुर्गन्ध और फीकापन :
★ जायफलके छोटे-छोटे टुकडोंको दिनमें २/३ बार चूसते रहनेसे मुखकी दुर्गन्ध और फीकापन दूर हो जाता है ।
१०. दन्त पीडा : रूईसे जायफलका तेल पीडायुक्त दान्तकी जडमें लगाने और खाली भागमें फोहा भरकर दबाए रखनेसे पीडामें लाभ मिलेगा ।
११. कटि-पीडा :
★ पानमें जायफलका टुकडा डालकर खाने और जायफलको जलमें घिसकर बनाए गए लेपको ‘गर्म-गर्म’ ही (कमरमें) कटिमें लगाकर मर्दन (मालिश) करें ! इससे कमरकी पीडा समाप्त हो जाती है ।
★ जायफलको जलके साथ, सिलबटेपर घिस लें ! तत्पश्चात उसे २०० मिलीलीटर तिल्लीके तेलमें अच्छी तरह उष्ण करें ! ठण्डा होनेपर कमरकी ‘मालिश’ करें ! इससे कमरकी पीडासे छुटकारा मिलता है ।
१२. बच्चोंके दूध न पचने पर : मांका दूध छुडाकर, ऊपरी दूध पिलानेपर यदि शिशुको न पच रहा हो, तो दूधमें एक जायफल डालकर खूब उबालें ! फिर ठण्डा करके पिलाएं ! इससे दूध सरलतासे पच जाएगा और बंधा हुआ मल दुर्गन्ध रहित होगा ।
१३. भूख न लगना : मधुके साथ एक ग्राम जायफलका चूर्ण प्रातः व संध्यामें खिलाएं ! इससे भूख लगना आरम्भ हो जाती है ।
१४. जोडोंकी पीडा : एक भाग जायफलका तेल और चार भाग सरसोंका तेल मिलाकर जोडोंकी वेदना, सूजन, मोचपर २ से ३ बार मालिश करें ! इससे लाभ मिलेगा ।
१५. नपुंसकता और शीघ्रपतन :
★ जायफलका चूर्ण एक चौथाई चम्मच सवेरे एवं संध्या समय मधुके साथ खाएं और इसका तेल सरसोंके तेलमें मिलाकर शिश्नपर (लिंगपर) मलें ! इससे नपुंसकता और शीघ्रपतनका रोग समाप्त हो जाता है ।
★ जायफलका चूर्ण आधा ग्राम, संध्याको जलके साथ खानेसे ६ सप्ताहमें ही धातुकी (वीर्यकी) कमी और दूर होगी ।
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