घरका वैद्य – काली मिर्च (भाग-१)


काली मिर्च एक लता जातिका पौधा है, जिसका तना काष्ठीय होता है । इसका तना स्तम्भाकार होता है, जो गठानोंपर अधिक मोटा होता है । इसकी पत्तियां ४ से ७ इंचतक लम्बी तथा २ से ५ इंचतक चौडी होती हैं । प्रत्येक पर्णपर ५ से ९ तक शिरायें स्पष्ट दिखाई देती हैं । पुष्प लम्बी-लम्बी मंजरियोंपर लगते हैं, फल गोल-गोल, छोटे तथा व्यासमें लगभग ०.५ से.मी.तक होते हैं । पकनेपर यह लाल हो जाते हैं । ये फल सूखनेपर काले, ‘झुर्रीदार’, सुगन्धित एवं स्वादमें तीखे होते हैं ।
 आयुर्वेदानुसार काली मिर्च एक दीपन-पाचक, ज्वरनाशक, वात-कफनाशक, कासनाशक, प्रतिश्यायहारी तथा नाडीको बल देनेवाली वनस्पति है । औषधिके रूपमें इसके फलोंका ही प्रयोग होता है ।
काली मिर्चका औषधीय महत्त्व
ऐसा व्यक्ति मिलना अत्यन्त कठिन है जो कालीमिर्चसे परिचित न हो । यह हमारे दैनिक उपयोगमें लाए जानेवाले मसालोंमेंसे एक प्रमुख घटक है । सभी प्रकारके मसाले न केवल भोजनका स्वाद बढाते हैं; अपितु स्वास्थ्य रक्षा एवं रोगमुक्तिमें भी इनकी बहुत बडी भूमिका है । यहां काली मिर्चके कुछ सामान्य प्रयोगोंके बारेमें बताया जा रहा है । इनका प्रयोग आप सहजताके साथ कर सकते हैं :
* पेटके रोगोंमें काली मिर्चका विशेष प्रयोग करनेपर शीघ्र लाभ मिलता है । अजीर्ण और ‘अफारा’की स्थितिमें, एक जैसी मात्रामें कालीमिर्च, सौंठ, पिप्पली तथा हरड चूर्णमें मधु मिलाकर चाटनेसे लाभ मिलता है ।
* यह अत्यन्त सरल तथा अति उपयोगी है । एक कप पानीमें आधा नींबू निचोड लें ! ६-७ कालीमिर्चको पीसकर मिला लें ! इसे प्रातः और सन्ध्या, भोजनके पश्चात पीनेसे भूख नहीं लगनेकी समस्या समाप्त होगी और खुलकर भूख लगेगी । अधिक भूख लगनेकी समस्या भी इसी प्रयोगसे दूर होती है ।


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