घरका वैद्य – काली मिर्च (भाग-२)


* ‘जुकाम’की स्थितिमें यह प्रयोग करें  !  २ ग्राम कालीमिर्चको पीसकर चूर्ण बना लें ! ‘गर्म’ दूधमें आवश्यकतानुसार मिश्री मिला लें !
कालीमिर्चके चूर्णको फांककर ऊपरसे दूध पी लें ! इससे ‘जुकाम’में लाभ मिलेगा ।
* पेटमें कीडेकी समस्या है तो यह प्रयोग करें ! ५-६ कालीमिर्चको पीसकर चूर्णकर लें । सवेरे कालीमिर्चका चूर्ण फांककर ऊपरसे छाछ पी लें ! ऐसा करनेसे पेटके कीडे मरकर बाहर निकल आते हैं ।
* सिरकी जुओंको मारनेके लिए यह प्रयोग करें ! सीताफलके १०-१२ बीज तथा ७-८ कालीमिर्चको मिलाकर अच्छी प्रकारसे पीस लें ! दो-तीन चम्मच सरसोंके तेलमें इस चूर्णके मिश्रणको ठीकसे मिला लें और बालोंकी जडोंमें अच्छी प्रकारसे लगा लें ! ऐसा सोनेसे पूर्व करें और सवेरे केशको धो लें ! सिरकी जुएं मरके बाहर आ जाएंगी ।
* आंखोंकी ज्योतिमें कालीमिर्चका प्रयोग अत्यन्त लाभप्रद है । इसके लिए आप १ ग्राम काली मिर्च व १ चम्मच घी (यदि गायका मिले तो और भी अच्छा है ।) एवं आवश्यकतानुसार मिश्री मिलाकर चाटें । बादमें ऊपरसे गुनगुना दूध पी लें ! ऐसा आप प्रातः व सन्ध्या समय करें ! इससे  दृष्टिको बल मिलता है, दृष्टि शीघ्र दुर्बल नहीं होती है । यह अत्यन्त उपयोगी उपाय है ।
* नेत्रोंके लिए एक और आसान उपयोगी उपाय है । आधा ग्राम कालीमिर्चके चूर्णको  एक  चम्मच  देसी घीमें हलका ‘गर्म’ करके सेवन करनेसे आंखोंसे सम्बन्धित अनेक समस्याएं समाप्त होकर दृष्टिको बल मिलता है ।
* आलस्य आदिमें यह उपाय करें !  ५-६ कालीमिर्च तथा लौंग, थोडी दालचीनी, थोडी सौंठ, २-३ हरी इलायची, इन सभीको कूटकर चूर्ण  बना  लें  !  इनका चूर्ण एक गिलास दूधमें मिलाकर सेवन करें !  आवश्यकतानुसार मिश्री मिला लें, इसके सेवनसे आलस्य एवं दुर्बलता दूर होती है ।


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