घरका वैद्य – कमल पुष्प (भाग-२)


* प्रातः २ ग्राम कमलकी जडके पेस्टको गायके घीके साथ मिलाकर सेवन करें ! इससे गुदाव्रण और इसके कारण होनेवाले ज्वरमें लाभ मिलता है ।
मूत्रमें वेदना व जलनकी समस्यामें : कमल एवं नीलकमलसे बने १०-२० मिली. शीतकषाय (रातभर ठण्डे पानीमें रखनेके पश्चात बना पदार्थ) या क्वाथमें (काढामें) मधु एवं चीनी मिला लें ! इसे पीनेसे मूत्रमें वेदना और जलनकी समस्या ठीक होती है ।
* तेलमें पकाए हुए २-४ ग्राम कमलकन्दको गायके मूत्रके साथ सेवन करें ! इससे मूत्रमें वेदनाकी समस्यामें लाभ होता है ।
ज्वरमें : कमलका काढा बनाकर १०-२० मिली. मात्रामें सेवन करनेसे ज्वरमें (बुखारमें) लाभ होता है ।
* समान भागमें उत्पल, अनार फलकी छाल तथा कमल केसर चूर्ण १-२ लें ! इसे तण्डुलोदकके (चावलके धोवन) साथ सेवन करनेसे ज्वरके साथ होनेवाले अतिसारमें (दस्तमें) तुरन्त लाभ होता है ।
होनेवाले शारीरिक लाभके विषयमें जानेंगें ।
*पेचिशके रोगमें : पित्तज दोषके कारण ‘दस्त’ हो रही हो या पेचिशकी समस्या हो तो समान भागमें कमलका पुष्प, नीलकमल, मंजिष्ठा तथा मोचरस लें और इन्हें १०० मिली. बकरीके दूधमें पकाकर सेवन करें !
* १०० मिली. बकरीके दूधमें आधा भाग जल, १-२ ग्राम सुंधबाला, २-४ ग्राम नीलकमल, १ ग्राम सौंठका चूर्ण और ५-१० मिली प्रश्निपर्णी रस मिला लें, इससे अतिसारपर (दस्तपर) रोक लगती है ।
* श्वेत कमल केसरके पेस्टमें खाण्ड, शर्करा तथा मधु मिला लें ! इसको चावलके धुले हुए पानीके साथ सेवन करनेसे ‘पेचिश’ ठीक होता है ।
रक्त अर्शमें (खूनी बवासीरमें) : कमलका पुष्प लें, इससे केसर (डंडियां) निकाल लें ! चीनी तथा कमलके केसरको मिलाकर मक्खनके साथ सेवन करनेसे रक्तवाले अर्शमें लाभ होता है ।
* १-२ ग्राम कमलके फूलके केसरमें मिश्री मिलाकर खानेसे योनिसे रक्त निकलनेकी समस्या और रक्त अर्शमें लाभ होता है ।


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