घरका वैद्य – लौंग (भाग-२)
वैज्ञानिक मतानुसार : लौंग ‘गर्म’ होता है । यह उदर पीडाको मिटानेवाला माना जाता है । गर्भवती स्त्रियोंको उल्टी होनेपर लौंगको गर्म पानीमें भिगोकर उसका पानी पिलानेसे लाभ होता है । इसके तेलके मर्दनका (मालिशका) प्रभाव सामान्य कर्पूरके तेलके समान होता है । इसका आसव बनाकर उसमेंसे सुगन्धित पदार्थ सिद्ध (तैयार) किए जाते हैं । कोको, चाकलेट, आइसक्रीम आदि खाद्य-पदार्थोंमें पाया जानेवाला बनावटी; वेनीला एसेन्स लौंगसे ही बनाया जाता है ।
उत्तम लौंगके लक्षण :
यदि लौंगमें झुर्रियां पडी हों तो समझें कि यह तेल निकाले हुए लौंग हैं
।
लौंग खानेके लाभ और उपयोग
१. मूर्छा (बेहोशी ) : लौंग घिसकर अञ्जन करनेसे मूर्छा दूर होती है । लौंगको घी या दूधमें पीसकर नेत्रोंमें लगानेसे हिस्टीरियाकी मूर्छा दूर हो जाती है ।
२. शीतप्रकोप (जुकाम):
लौंगका काढा पीनेसे शीतप्रकोप ठीक हो जाता है । १०० मिलीलीटर जलमें ३ लौंग डालकर उबाल लें । उबलनेपर जब पानी आधा शेष रह
जाए तो इसके अन्दर थोडासा लवण (नमक) मिलाकर पीनेसे शीतप्रकोप दूर हो जाता है । २ बूंद लौंगके तेलको लेकर २५-३० ग्राम शक्करमें मिलाकर सेवन करनेसे ‘जुकाम’ समाप्त हो जाता है । लौंगके तेलको किसी स्वच्छ छोटे
वस्त्रपर डालकर सूंघनेसे शीतप्रकोप मिटता है ।
पानमें २ लौंग डालकर खानेसे शीतप्रकोप ठीक हो जाता है ।
३. रतौंधी : १ लौंगको बकरीके दूधके साथ पीसकर अंजनके (काजलके)
जैसै नेत्रोंमें लगानेसे धीरे-धीरे रतौंधी रोग समाप्त हो जाता है ।
४. ज्वर : १ लौंग पीसकर गर्म जलसे पी लें ! इस प्रकार प्रतिदिन ३ बार यह प्रयोग करनेसे सामान्य ज्वर दूर होता है ।
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