घरका वैद्य – लौंग (भाग-३)
५. आंखपर दानेका निकलना : आंखोंमें दाने निकल जानेपर लौंगको घिसकर लगानेसे वह बैठ जाता है ।
६. दन्त रोग : दन्तमें कीडे लगनेपर लौंगको दन्तके खोखले स्थानमें रखनेसे या लौंगका तेल लगानेसे लाभ मिलता है । लौंगको अग्निपर भूनकर दन्तके गड्ढेमें रखनेसे दन्तपीडा समाप्त होती है ।
★ लौंगके तेलमें कर्पूरका चूर्ण मिलाकर पीडावाले दन्तपर लगानेसे पीडामें लाभ मिलता है ।
★ ५ लौंग पीसकर उसमें नींबूका रस निचोडकर दन्तपर मलनेसे दन्त पीडामें लाभ होता है अथवा ५ लौंग १ गिलास जलमें उबालकर इससे प्रतिदिन ३ बार कुल्ला करनेसे लाभ होता है।
७. प्रमेह : लौंग, जायफल और पीपलको ५ ग्राम लेकर २० ग्राम कालीमिर्च और १६० ग्राम सौंठ मिलाकर चूर्ण बना लें । उसके पश्चात चूर्णमें उसीके समान मात्रामें शक्कर डालकर खाएं । इससे खांसी, ज्वर, भूखका न लगना, प्रमेह, सांस रोग और अधिक ‘दस्त’का आना समाप्त होता है ।
८. सूखी या गीली खांसी : प्रातः-संध्यामें दो-तीन लौंग मुंहमें रखकर रस चूसते रहना चाहिए ।
★ लौंग या विभीतक फल मज्जाको घीमें तलकर रख लेना चाहिए । इसे खांसी आनेपर चूसना चाहिए, इससे सूखी खांसीमें लाभ होता है ।
★ लौंग और अनारके छिलकेको समान पीस लें, तत्पश्चात इसे चौथाई चम्मच भर लेकर आधे चम्मच शहदके साथ प्रतिदिन ३ बार चाटें । इससे खांसी ठीक हो जाती है ।
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