◆ रूईकी बत्ती बनाकर मधुमें भिगोकर जलाएं । यदि बत्ती जलती रहे तो मधु शुद्ध है ।
◆ एक जीवित मक्खी पकडकर मधुमें डालें और उसके ऊपर मधु डालकर मक्खी को दबा दें । मधु शुद्ध होनेपर मक्खी मधुमेंसे स्वयं ही निकल आएगी और उड जाएगी ।
◆ मक्खीके पंखोंपर मधु नहीं चिपकता । वस्त्रोंपर मधु डालें और पोंछ लें, शुद्ध मधु वस्त्रोंपर नहीं लगता ।
◆ मधुको आंखमें काजलकी भांति लगाएं । तनिक जलन होगी, पानी निकलेगा और आंखमें ठण्डक पड जाएगी, आंख चिपचिपी नहीं होगी ।
◆ कागदपर मधु डालनेसे नीचे ‘धब्बा’ नहीं आता ।
◆ शुद्ध मधुको कुत्ता नहीं खाता ।
◆ शुद्ध मधुमें सुगन्ध रहती है ।
◆ उत्तम मधु शीतकालमें जम जाता है तथा उष्ण होनेपर पिघल जाता है ।
यदि मधुसे कोई हानि प्रतीत होती हो तो नींबूका रस सेवन करें । ऐसी दशामें नींबूका सेवन विकारोंको दूरकर लाभ पहुंचाता है । मधुको दूध, पानी, दही, मलाई, रोटी, तरकार, फलोंका रस, नींबू आदि किसीमें भी मिलाकर ले सकते हैं ।
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