● पित्ती : नागकेसर एक भाग और मधु पांच भागको मिलाकर रोगीको प्रातः सायं दोनों समय चटाएं । यह एक लाभकारी प्रयोग है ।
● फुंसियां : आटा और मधुको मिलाकर लेई बना लें । इसको वस्त्रपर लगाकर, फुंसियोंपर लगाएं, लाभप्रद है । कोई भी चर्मरोग हो तो मधुकी पट्टी बांधनेसे लाभ होता है । दाद, खाज, फोडे इत्यादि रोगोंमें, ४० ग्राम मधुको ३०० ग्राम जलमें मिलाकर प्रातःकालमें कुछ माहतक सेवन करनेसे रक्त स्वच्छ होकर लाभ होता है । मधु त्वचाको कोमल बनाता है । एडियां फटने, तलवोंमें खाबरे होना, वर्षाके अस्वच्छ पानीसे पांवोंमें खुजली व फुंसियां होना, अङ्गुलियोंके नख उतर जानेपर तीन-चार बार मधु लगाना चाहिए ।
● विसर्प : विसर्प होनेपर बार-बार शुद्ध मधु लगानेसे या वस्त्रपर मधु लगाकर, लगानेसे लाभ होता है ।
● विषैले दंश : सियार, कुत्ता, बिच्छू इत्यादिके काटनेसे और कटे हुए स्थानपर मधु लगानेसे और मधुके आन्तरिक सेवन करनेसे लाभ होता है ।
● वमन होना, हिचकी आना : प्याजका रस और मधु दो-दो चम्मच मिलाकर चाटनेसे लाभ होता है । केवल मधु चाटनेसे भी हिचकियां आनी बन्द हो जाती हैं ।
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