* गर्भावस्थामें है सहायक : मां और बच्चे दोनोंके लिए गर्भावस्थाके मध्य इसके कई लाभ हैं । मक्का ‘फोलिक एसिड’से भरे होते हैं, इसमें ‘जेक्सैन्थिन’ और रोगनाशक अम्ल होता है जो बच्चेमें जन्म दोषोंके कष्टको कम करता है । यह बच्चेको मांसपेशियोंके विकृति और शारीरिक समस्याओंसे बचा सकता है । इसकी उच्च ‘फाइबर’ सामग्रीके कारण, यह मलबद्धताको (कब्जको) दूर करता है । जो गर्भावस्थामें माताओंके लिए एक सामान्य चिन्ताका विषय है । गर्भावस्थामें भी भुट्टा खाना लाभकारी सिद्ध हो सकता है । कारण यह है कि इसमें ‘कैल्शियम’, ‘आयरन’ और ‘फोलिक एसिड’के साथ-साथ ‘विटामिन सी’, ‘डी’ और ‘ए’ पाया जाता है । इसके साथ ही इसमें ‘फोलिक एसिड’ और ‘विटामिन-बी’ होनेवाले शिशुमें ‘न्यूरल ट्यूब’ दोषसे (शिशुके मस्तिष्क व रीढमें विकार उत्पन्न होनेसे) सुरक्षा मिलनेमें सहायता प्राप्त होती है । गर्भावस्थामें शर्कराकी (जेस्टेशनल डायबिटीजकी) समस्यामें चिकित्सक पौष्टिक आहारमें मक्का लेनेका भी सुझाव देते हैं । इन सभी तथ्योंको देखते हुए यह कहा जा सकता है कि मक्काका प्रयोग गर्भावस्थामें लाभकारी परिणाम प्रदर्शित कर सकता है । गर्भवती महिलाओंको भी मक्काको अपने आहारमें अवश्य रखना चाहिए । इसमें ‘फॉलेट’ और ‘विटामिन बी’ अच्छी मात्रामें पाया जाता है, जो कि गर्भस्थ शिशुमें नई कोशिकाओंके विकासके लिए आवश्यक होता है । ‘फॉलेट’ गर्भावस्थामें मां और शिशु, दोनोंके लिए बहुत उपयोगी होता है । इसमें कई प्रकारके ‘विटामिन्स’ और खनिज पाए जाते हैं, जो गर्भावस्थामें बहुत लाभकारी होते हैं; किन्तु आपको किसी प्रकारकी स्वास्थ्यकी समस्या है तो चिकित्सकसे भी परामर्श लेना चाहिए ।
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