मक्का या भुट्टाका चयन और लम्बे समयतक सुरक्षित रखनेकी प्रणालीमें, इन्हें क्रय करते समय ध्यान रखना होगा कि यह ‘ताजे’ हों और इनपर किसी प्रकारका दाग या धब्बा न दिखे । कक्षके सामान्य तापमानपर स्वच्छ मक्काको तीन दिनतक रखकर प्रयोग किया जा सकता है । यदि इन्हें तीन दिनमें नहीं खानेवाले हैं, तो इन्हें ‘प्लास्टिक’से लपेटकर शीतकपाटिकामें (फ्रिजमें) रखकर, लगभग एक सप्ताहतक सुरक्षित किया जा सकता है । लम्बे समयतक सुरक्षित रखनेके लिए इसके दानोंको पृथककर, बन्द थैलीमें डालकर ‘फ्रीजर’में रख दें ।
* मक्का या भुट्टेसे हानियां : जहां भुट्टेकी ढेरों लाभ हैं, वहीं हानियां भी कई हैं । इसपर अवश्य ध्यान देना चाहिए । मक्का उच्च ‘फाइबर’का एक अच्छा स्रोत है । ‘फाइबर’की अधिक मात्रा पेटमें पीडा, पेटका फूलना और मलबद्धता जैसी समस्याको न्योता दे सकती है । इसलिए मक्केके कच्चे दानोंका सेवन सीमित मात्रामें करना चाहिए । इसे खानेके पश्चात पानी पीनेकी शीघ्रता नहीं करनी चाहिए । विशेषज्ञ वयस्कोंको प्रतिदिन अधिकाधिक २५ से ३० ग्रामतक ही ‘फाइबर’ लेनेका परामर्श देते हैं । ‘कॉर्न’का अधिक उपयोग शरीरमें ‘पेलाग्रा’ (‘विटामिन बी-3’की न्यूनता) उत्पन्न कर सकता है । ‘पेलाग्रा’में ‘दस्त’, त्वचारोग और भ्रमकी स्थिति उत्पन्न हो सकती है । मक्कामें पाया जानेवाला ‘ग्लूटेन’ कई लोगोंमें चर्मरोगका कारण भी बन सकता है ।
* पाचन : जिन लोगोंको पाचनकी समस्याएं होती हैं, उन्हें मक्काका सेवन करनेसे बचना चाहिए । इसे पचनेमें भी समय लगता है; इसीलिए अपनी अपचकी समस्यासे बचनेके लिए इसका सेवन सावधानीसे करें ।
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