घरका वैद्य – मक्का (भाग-२)


जब आप भुट्टे खाएं तो दानोंको खानेके पश्चात भुट्टेका जो भाग बचता है, उसे फेंकें नहीं; अपितु उसे मध्यमेंसे तोड लें और उसे सूंघें । इससे ‘जुकाम’में बडा लाभ मिलता है । तदुपरान्त इसे पशुको खानेके लिए डाल सकते हैं । यदि आप इसे पशुओंको नहीं देते हैं तो उन्हें सूखाकर रखें और उन्हें जलाकर राख बनाकर रख लें । सांसके रोगोंमें यह बडी अचूक चिकित्सा है । इस राखको प्रतिदिन गुनगुने पानीके साथ फांकनेसे खांसी ठीक होती है । खांसी कैसी भी हो, यह चूर्ण लाभ देता ही है । यहांतक कि कुकर खांसीमें भी बडा लाभ होता है ।
आयुर्वेदके अनुसार भुट्टा तृप्तिदायक, वातकारक, कफ और पित्तनाशक, मधुर और रुचिकारक अनाज है । इसकी विशेषता यह है कि पकानेके पश्चात इसकी पौष्टिकता और बढ जाती है । पक्के हुए भुट्टेमें पाया जानेवाला ‘कैरोटीनायड’ ‘विटामिन-ए’का अच्छा स्रोत होता है ।
भुट्टेको पकानेके पश्चात उसके ५० प्रतिशत ‘एंटी-ऑक्सीअडेंट्स’ बढ जाते हैं । यह बढती आयुको रोकता है और कर्करोगसे रक्षा करनेमें सहायता करता है । पके हुए भुट्टेमें ‘फोलिक एसिड’ होता है, जो कि कर्क (‘कैंसर’) जैसे रोगोंसे बचाए रहनेमें बहुत अच्छा सहायक होता है ।
इसके अतिरिक्त भुट्टेमें खनिज और ‘विटामिन’ प्रचुर मात्रामें पाए जाते हैं । भुट्टेको एक उच्चतर ‘कोलेस्ट्रॉल फाइटर’ माना जाता है, जो हृदयके रोगियोंके लिए बहुत अच्छा है ।

बच्चोंके विकासके लिए भुट्टा बहुत लाभदायक माना जाता है । ‘ताजे’ दुधिया (जो कि पूर्ण प्रकारसे पका न हो) मक्काके दाने पीसकर एक कांचके डिब्बियामें भरकर धूपमें रखिए । जब उसका दूध सूखकर उड जाए और कांचके बर्तनमें केवल तेल रह जाए, तो उसे छान लीजिए । इस तेलको छोटे बच्चोंके पांवोंमें मर्दन (मालिश) कीजिए । इससे बच्चोंका पांव अधिक बलिष्ठ हो जाएंगे और बच्चा शीघ्रतासे चलने लगेगा ।



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