* ‘टी.बी.’के रोगियोंके लिए मक्का बहुत अच्छी औषधि है । ‘टीबी’के रोगियोंको या जिन्हें ‘टी.बी.’ होनेकी आशङ्का हो, प्रतिदिन मक्केकी रोटी खाना चाहिए । इससे टी.बी.’की चिकित्सामें लाभ होगा ।
* मक्केके बालका उपयोग पथरीके रोगोंकी चिकित्सामें होता है । पथरीसे बचावके लिए रातभर मक्कीके बालोंको (सिल्कको) पानीमें भिगोकर प्रातः ‘सिल्क’ हटाकर पानी पीनेसे लाभ होता है । पथरीके उपचारमें ‘सिल्क’को पानीमें उबालकर बनाए गए काढेका प्रयोग होता है ।
* यदि गेहूंके आटेके स्थानपर मक्काके आटेका प्रयोग करें, तो यह यकृतके (लीवरके) लिए अधिक लाभकारी है । यह प्रचुर मात्रामें तन्तुओंसे भरा हुआ है; इसलिए इसे खानेसे आमाशय अच्छा रहता है । इससे मलबद्धता (कब्ज), ‘बवासीर’ और पेटके कर्क रोग (कैंसरक) होनेकी आशंका दूर होती है ।
* भुट्टेके पीले दानोंमें बहुत सारा ‘मैगनीशियम’, ‘आयरन’, ‘कॉपर’ और ‘फॉस्फोरस’ पाया जाता है, जिससे अस्थियां सबल बनती हैं । ‘एनीमिया’को दूर करनेके लिए भुट्टा खाना चाहिए; क्योंकि इसमें ‘विटामिन बी’ और ‘फोलिक एसिड’ होता है ।
* खुजलीके लिए भी भुट्टेका ‘स्टॉर्च’ प्रयोग किया जाता है । वहीं इसके सौन्दर्य लाभ भी कुछ कम नहीं है । इसके ‘स्टार्च’के प्रयोगसे त्वचा सुन्दर और चिकनी बन जाती है ।
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