* भुट्टा हृदय रोगको भी दूर करनेमें सहायता करता है; क्योंकि इसमें ‘विटामिन सी’, ‘कैरोटिनॉइड’ और ‘बायोफ्लेवनॉइड’ पाया जाता है । यह ‘कोलेस्ट्रॉल’के स्तरको बढनेसे बचाता है और शरीरमें रक्तके प्रवाहको भी बढाता है ।
* इसका सेवन गर्भावस्थामें भी बहुत लाभदायक होता है, इसलिए गर्भवती महिलाओंको इसे अपने आहारमें सम्मिलित करना चाहिए; क्योंकि इसमें ‘फोलिक एसिड’ पाया जाता है, जो गर्भवतीके लिए अति आवश्यक है ।
* खांसी, कुकुर-खांसी, ‘जुकाम’के लिए : मक्काका भुट्टा जलाकर, उसकी राख पीस लें । इसमें स्वादानुसार सेंधा ‘नमक’ मिला लें । नित्य चार बार चौथाई चम्मच ‘गर्म’ पानीसे फांक लें, खांसीमें लाभ होगा ।
* मूत्रकी जलन : ‘ताजा’ मक्मेंके भुट्टे पानीमें उबालकर, उस पानीको छानकर मिश्री मिलाकर पीनेसे मूत्रकी जलन, ‘गुर्दों’की निर्बलता दूर हो जाती है ।
* पथरी : मक्काके भुट्टे जलाकर राख कर लें । जौ जलाकर राख कर लें । दोनोंको पृथक-पृथक पीसकर, ‘शीशियों’में भरकर रख लें । एक पात्र पानीमें दो चम्मच मक्काकी राख घोलें, उसे छानकर इस पानीको पी जाएं, इससे पथरी पिघलती है, मूत्र भी साफ आता है । जिसे यक्षमाकी (टीबीकी) आशंका हो, उसे मक्काकी रोटी खानी चाहिए ।
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