* ‘किडनी’की समस्या : मक्केकी बालियां ‘किडनी’में होनेवाली समस्याओंको रोकनेमें बहुत सहयोगी मानी जाती हैं । मक्केकी बालियांके (ताजे दुधिया, जो पूर्णतः पका न हो) दाने पीसकर एक ‘शीशे’के पात्रमें भरकर धूपमें रखिए । जब उसका दूध सूखकर उड जाए और शीशीमें केवल तेल रह जाए तो उसे छान लीजिए । उसके पश्चात प्रतिदिन एक चम्मच तेलको चीनीके बने पेयमें (शर्बतमें) मिलाकर पीनेसे बल बढता है । ताजा मक्काके भुट्टेको पानीमें उबालकर, उस पानीको छानकर मिश्री मिलाकर पीनेसे मूत्रकी जलन व ‘गुर्दों’की (किडनीकी) समस्या समाप्त हो जाती है ।
* स्वस्थ्य त्वचाके लिए : ‘फ्री-रैडिकल्स’से होनेवाली हानिके कारण झुर्रियों जैसी त्वचाकी समस्या होती हैं । मक्केमें स्थित ‘बीटा-कैरोटिन’ होता है, जो ‘विटामिन ए’, ‘विटामिन सी’ और कई महत्त्वपूर्ण ‘एंटी-ऑक्सिडेंट्स्’ होते हैं । ये सभी तत्त्व त्वचाको स्वस्थ्य रखनेमें सहायता करते हैं । साथ ही ‘एंटी-एजिंग’ प्रभावोंके कारण, यह त्वचाको तरुण भी रखते हैं । इसका अर्थ यही है कि मक्का खानेसे त्वचा स्वस्थ्य रहती है । ‘बीटा-कैरोटिन’का भी बहुत अच्छा स्रोत होता है, जो कि शरीरमें जाते ही ‘विटामिन ए’में परिवर्तित जाता है और ‘विटामिन ए’ आंखों और त्वचाके लिए बहुत आवश्यक होता है । ‘विटामिन ए’ बहुत प्रभावी ‘एंटीऑक्सीडेंट’के रूपमें कार्य करता है जो आंखोंको मोतियाबिन्दसे बचानेका कार्य करता है । यह त्वचाको भी स्वस्थ्य बनाता है । इतना ही नहीं, मक्काका आटा शरीरकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी बढाता है । मक्कामें ‘विटामिन सी’ और ‘लाइकोपीन’ होता है, जो आपकी त्वचाको सूर्यकी ज्वलनशील किरणोंके सम्पर्कमें आनेसे होनेवाली हानिसे बचाने सहायता करता है । आप अपने चेहरेपर मक्काका ‘स्टार्च’ या मक्काका तेल भी लगा सकते हैं । ‘विटामिन ई’से समृद्ध होनेके कारण यह ‘चेहरेके मुंहासों’के चिह्नोंको कम करनेमें भी सहायता करता है ।
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