घरका वैद्य – मक्का (भाग-९)


* ‘कैंसर’की रोकथामके लिए : इसमें ‘एंटीऑक्सीडैंट’ और ‘फ्लेवेनॉइड’ गुण होते हैं जो कर्करोग जैसे गम्भीर रोगोंकी रोकथाम करते हैं । मक्कामें पाए जानेवाले ‘फेरूलिक एसिड’ स्तनमें ‘कैंसर’ होनेसे बचाता है ।

कई प्रकारके अध्ययनोंसे जाननेमें आया है कि मक्का ‘एंटी-ऑक्सीडेंट्स’का बहुत अच्छा स्रोत होता है, जो कर्करोगकी (कैंसरकी) रोकथाम करनेमें महत्त्वपूर्ण होता है । मक्कामें ‘बीटा-क्रिप्टोजेंथिन’ भी होता है, जो फेफडोंके ‘कैंसर’का सङ्कट कम करता है । इसमें पाए जानेवाले ‘एंटी-ऑक्सीडेंट्स’ यकृत (लिवर) और छातीके कर्करोगके भय भी कम करते हैं । इतना ही नहीं, मक्काका आटा ‘कोलेस्ट्रॉल’को कमकर ‘मेटाबॉलिज्म’को बढाकर भार घटानेमें प्रभावकारी है । मक्केकी बालियां, बढती आयुको रोकती हैं और कर्करोगसे सङ्घर्ष करनेमें सहायता करती हैं । पके हुए भुट्टेमें ‘फोलिक एसिड’ होता है जो कि कर्करोगसे सुरक्षा करता है । मक्केकी बालियोंमें पाए जानेवाले खनिज हृदय रोग के लिए अति सहायक होते हैं ।
* मक्का खानेके अन्य लाभ : मक्कामें ‘फाइबर’से परिपूर्ण ‘डाइटरी फाइबर’ होता है, जो पाचनको बढा देता है और मलबद्धता (कब्ज) जैसी समस्याओंसे बचाता है । ‘एनिमिया’में ‘विटामिन बी 12’, ‘आयरन’ और ‘फोलिक एसिड’ होता है, जो लाल रक्त कोशिकाओंके उत्पादनमें सहायता करता है । इसके सेवन शरीरमें रक्तकी न्यूनताकी पूर्ति होती है । ऐसेमें यदि किसीको भी ‘एनिमिया’का भय है तो आहारमें मक्काको अवश्य लें ।
* ऊर्जाका स्रोत : मक्का शरीरको दिनभर कार्य करनेके लिए ऊर्जा देती है । मक्कामें जटिल ‘कार्ब्स’ (Complex Carbs) होते हैं, जो शरीरको लम्बे समयतक ऊर्जा प्रदान करते हैं । इसके लिए मक्काके ‘सलाद’को अपने आहारमें सम्मिलित कर सकते हैं ।



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