घरका वैद्य – मर्दन चिकित्सा (भाग-१)


मर्दन अर्थात मालिश चिकित्सा : यह एक अति प्राचीन चिकित्सा प्रणाली है और आज भी भारतके घर-घरमें यह प्रचलित है । इस अंकमें हम आपको इस चिकित्सा प्रणालीके कुछ तत्त्वोंसे परिचय कराते हैं ।
मर्दनके विभिन्न प्रकारोंका वर्णन तथा मर्दनसे लाभ : मर्दनकी विविध विधियोंको समझानेसे पूर्व इस सम्बन्धमें कुछ विशेष बातें समझ लेनी चाहिए ।
★ मर्दन करते समय यह बात सदैव ध्यान रखनी चाहिए कि मर्दन इस रीतिसे किया जाए, जिससे रक्तका प्रवाह हृदयकी ओर ही रहे ।
★ मर्दनके सम्बन्धमें दूसरा स्मरणीय नियम यह है कि मर्दन धूपमें अधिक लाभ प्रदायनी होता है । रोगावस्थामें रोगी जितनी कडी धूप सरलतासे सहन कर सके, उतनी ही कडी धूपमें उसके शरीरका मर्दन करना चाहिए । यदि धूप अधिक तीव्र हो तो उसके शरीरको भलीभांति ढक देना चाहिए । जिन्हें धूप स्नान वर्जित हो, ऐसे रोगियोंको धूपमें बैठाकर मर्दन कदापि नहीं करना चाहिए तथा मर्दनके उपरान्त स्नान कर लेना अथवा गीले कपडेसे शरीरको ठीकसे पोंछ लेना अति आवश्यक है । ऐसा करनेसे मज्जा तन्तुओंमें उत्तेजना एवं शक्ति उत्पन्न होकर मर्दनका पूरा-पूरा लाभ प्राप्त होता है । मर्दनमें केवल अङ्गोंको साधारण रूपसे मलना ही नहीं होता है; अपितु मलते समय, मलनेकी क्रियामें विभिन्न ढंगोंसे गतियां उत्पन्न करनी होती है ।



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