घरका वैद्य – मोगरा
मोगरा एक ऐसा पुष्प है, जो अपनी सुगन्धसे सबको अपनी ओर सहज ही आकर्षित करता है । यह एक सात्त्विक पुष्प है, जिसका प्रयोग पूजा आदिमें अधिकतर किया जाता है । सूर्यकी धूप प्रखर होते ही सूखेसे मोगरेके पौधेमें नई कोंपलें आने लगती हैं और मोतीसी सुन्दर कलियां खिलकर अपनी सुगन्ध बिखेरने लगती हैं । जैसे-जैसे ग्रीष्म ऋतुकी उष्णतामें वृद्धि होती है, इसकी सुगन्ध व शीतलता मनको स्फूर्ति देती है । अपनी सुन्दरताके साथ-साथ मोगरा बहुत गुणकारी भी है ।
मोगरेका वानस्पतिक नाम Jasminum sambac है जो एक पुष्प देनेवाला पौधा है । इसे संस्कृतमें ‘मालती’ तथा ‘मल्लिका’ कहते हैं । मोगरा एक भारतीय पुष्प है । मोगरेके पुष्पसे सुगन्धित पुष्पोंकी माला बनाई जाती हैं । पूर्वकालसे ही मोगरेके पुष्पोंको केशोंमें लगानेका भी प्रचलन है अर्थात यह नारी शृंगारका अविभाज्य अङ्ग रहा है ।
आकर्षक होनेके साथ-साथ मोगरेके पुष्पके अनेक शारीरिक लाभ भी हैं, जिनमेंसे कुछ निम्नलिखित हैं –
मोगरेके शारीरिक लाभ :
१. इसका पुष्पसार (इत्र) कर्ण पीडामें प्रयोग किया जाता है ।
२. मोगरा कुष्ठरोग, मुख और आंखके रोगोंमें लाभ देता है ।
३. मोगरेका उपयोग ‘एरोमा थैरेपी’में किया जाता है । इसकी सुगन्ध शान्ति देती है और उत्साहसे भरती है ।
४. मोगरेकी चाय (क्वाथ) ज्वर, सङ्क्रमण (इन्फेक्शंस) और मूत्ररोगोंमें लाभकारी होती है ।
५. मोगरेकी चाय प्रतिदिन पीनेसे कर्करोग अर्थात ‘कैंसर’से बचाव होता है । इसमें मोगरेके पुष्पों और कलियोंका उपयोग होता है ।
६. मोगरेकी ४ पत्तियोंको पीसकर एक कप जलमें मिला दें, इसमें मिश्री मिलाकर दिनमें ४ बार पीनेसे अतिसारमें (दस्तमें) लाभ होता है ।
७. मोगरेकी पत्तियोंको पीसकर जिस स्थानपर भी दाद, खुजली और फोडे-फुंसियां हो, वहां लगानेसे लाभ मिलता है ।
८. बच्चोंके यकृत (लीवर) बढनेमें मोगरेकी पत्तियोंका ४-५ बूंद रस मधुके (शहद) साथ देनेसे लाभ होता है ।
९. कोई घाव ठीक न हो रहा हो तो बेलवाले मोगरेकी पत्तियोंको पीसकर लगानेसे घाव ठीक हो जाता है ।
१०. इसकी जडका काढा पीनेसे अनियमित मासिक, नियमित होता है ।
११. इसके दो पत्तोंका सेवन काला लवण (नमक) लगाकर करनेसे उदरकी वायु (गैस) दूर होती है ।
१२. इसके फूलोंके उपयोगसे उदरके कृमि (कीडों), पीलिया, त्वचा रोग, ‘कंजक्टिवाईटिस’ आदिमें लाभ होता है ।
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