२. मूंगफलीके कुछ विभिन्न नाम : मूंगफलीको अंग्रेजीमें ‘पीनट’ या ‘ग्राउण्डनट’ (peanut, groundnut) कहते हैं । इसका वानस्पतिक नाम : ‘Arachis hypogaea’ है । इसे तेलगु भाषामें ‘पल्लेलु’, तमिलमें ‘कडलई’, गुजरातीमें ‘सींगदाना’ और मराठीमें ‘शेंगदाणे’ कहा जाता है ।
३. मूंगफलीका तेल : मूंगफलीसे तेल निकाला जाता है, जिसे भोजन पकानेके कार्यमें प्रयोग किया जाता है । यह तेल भोजन बनानेके लिए सर्वश्रेष्ठ होता है । मूंगफलीके तेलमें, जैतूनके तेलसे भी अच्छे गुण होते हैं । यह एक फली है; किन्तु इसमें मेवोंके जैसे गुण होनेके कारण यह ‘नट’ (NUT) कहलाती है ।
४. रक्त-शर्कराके लिए : मूंगफली रक्त-शर्कराको सन्तुलित रखती है । मूंगफलीमें उपस्थित ‘मैंगनीज’ रक्तमें ‘कैल्शियम’के अवशोषण, वसा (फैट), ‘कार्बोहाइड्रेट’ और शर्कराके स्तरको सन्तुलित रखनेमें सहायता करती है । प्रतिदिन भोजन करनेके पश्चात ४० से ५० ग्राम मूंगफली खानेसे, आपके शरीरके रक्तका अनुपात बढ सकता है । ‘मैंगनीज’, वसा (फैट) और ‘कार्बोहाइड्रेट’के पाचनको बढाता है, जिसकी सहायतासे यह मांसपेशियों और यकृतकी (लिवरकी) कोशिकाओंमें ‘ग्लूकोज’ शर्करा प्रवेश करता है और रक्त-शर्कराके स्तरको नियन्त्रित करनेमें सहयोग करता है ।
एक अध्ययनके अनुसार, मूंगफलीका सेवन मधुमेहकी तीव्रताको २१% तक न्यून कर सकता है । ‘डायबिटीज’वालोंके लिए इसमें ‘कार्बोहाइड्रेट’की कम मात्रा तथा ‘प्रोटीन’, वसा (फैट) व ‘फाइबर’की अधिक मात्रा होनेके कारण इसका ‘ग्लाइसेमिक इंडेक्स’ बहुत कम होता है । जो यह दर्शाता है कि इसे खानेके पश्चात रक्तमें ‘कार्ब्स’ शीघ्रतासे प्रवेश नहीं करते । इस कारणसे रक्तमें शक्करकी मात्रा बहुत सरलतासे नहीं बढती । अतः मधुमेहवालोंके लिए इसका उपयोग कदापि हानिकारक नहीं हो सकता ।
Leave a Reply