घरका वैद्य – पारिजात (भाग-३)


जीर्ण ज्वरमें लाभप्रद : इसके ७-८ कोमल पत्तोंके रसमें ५-१० मि.ली. अदरकका रस व मधु (शहद) मिलाकर प्रातःकाल और सन्ध्यामें लेनेसे जीर्ण ज्वरमें लाभ होता है ।
ज्वर उतारनेमें : हरसिंगारके (पारिजातके) वृक्षके पत्तेका क्वाथ (काढा) बना लें । १०-३० मिली. काढामें अदरकका चूर्ण तथा मधु मिलाकर सेवन करें ! इससे साधारण ज्वर सहित ज्वरकी गम्भीर स्थितिमें भी लाभ होता है ।
 ५-१० मिली. हरसिंगारके पत्तेके रसमें १-२ ग्राम त्रिकटु चूर्ण मिलाकर सेवन करें, इससे भी गम्भीर ज्वर उतर जाता है ।
 ३०-३५ पत्तोंके रसमें मधु मिलाकर ३ दिनतक लेनेसे ज्वरमें लाभ होता है ।
 बच्चोंके पेटमें कृमि : इसके ७-८ पत्तोंके रसमें थोडासा गुड मिलाकर पिलानेसे कृमि मलके साथ बाहर आ जाते हैं या मर जाते हैं ।
 जलन व सूखी खांसीमें लाभप्रद : इसके पत्तोंके रसमें मिश्री मिलाकर पिलानेसे पित्तके कारण होनेवाली जलन आदि विकार तथा मधु मिलाकर पिलानेसे सूखी खांसी मिटती है ।
 रूसीकी समस्यामें : हरसिंगारके बीज लें और इसका पेस्ट बनाएं, इसे सिरपर लगानेसे रूसीकी समस्या समाप्त होती है ।
गलेके रोगमें : जीभके पास एक घण्टी जैसा छोटा-सा मांसका टुकडा होता है, उसे गलशुण्डी बोलते हैं । इससे सम्बन्धित रोग हो तो हरसिंगारकी जडको चबाएं, इससे गलशुण्डीके विकार ठीक होते हैं ।


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