घरका वैद्य – पाटल पुष्प (गुलाब) (भाग – ७)


** ‘गुलाबजल’ बनानेकी विधि : आधुनिक समयमें भिन्न-भिन्न प्रकारके संस्थानोंमें इसका निर्माण होने लगा है, जिससे यह सरलतासे मिल जाता है; परन्तु ‘गुलाबजल’ बनानेकी विधि अत्यन्त सरल है, जो आप घरपर भी कर सकते हैं । ‘गुलाब’जल बनानेके लिए तीन पदार्थोंकी आवश्यकता होती है – ‘गुलाब’की पंखुडियां, जल और हिम (बर्फ) । इसके लिए एक ऐसा पात्र लीजिए, जिसमें एक दूसरा पात्र भी आ सके । अब इस पात्रमें एक वेदी (स्टैंड) रख दीजिए । तदुपरान्त एक गिलास जलमें लगभग १५ ‘गुलाब’के पुष्पकी पंखुडियोंके साथ इस पात्रमें डाल दें और वेदीके ऊपर एक रिक्त पात्र रखें ! अब इस पात्रको ‘गैस’पर लगभग २० से २५ मिनिट तकके लिए रखें और ‘गर्म’ होने दें ! जब यह ‘गर्म’ होगा, तो यह भापके रूपमें ऊपर आएगा; परन्तु हमें इसे एकत्र करनेके लिए, इस पात्रके ऊपर एक उल्टा ढक्कन रखना होगा । तब इस ढक्कनपर हिमके (बर्फके) टुकडे रखें, जिससे यह भाप बाहर न निकले और शीतल होकर, उस रिक्त पात्रमें जलके रूपमें एकत्र हो सके ।
    पात्रको गैससे हटाकर ठण्डा होनेके लिए रख दें ! इस प्रकार ‘गुलाबजल’का उत्पादन आप घरपर ही कर सकते हैं । इससे आपको बिना रासायनिक तत्त्व मिला हुआ, शुद्ध ‘गुलाबजल’ भी मिल जाएगा और धनकी भी बचत होगी । पाटल पुष्प अर्थात गुलाबके प्रयोगमें सावधानियां :  औषधीय गुणोंसे सम्पन्न ‘गुलाबकी चाय’का सेवन करनेके कोई विशेष दुष्‍प्रभाव नहीं होते हैं । यद्यपि इसका अधिक मात्रामें सेवन नहीं किया जाना चाहिए । एक दिनमें ‘गुलाबकी चाय’को ५ कपसे अधिक सेवन न करें !
* अधिक मात्रामें ‘गुलाब’की पंखुडियोंका उपयोग करनेपर गम्भीर अतिसार (दस्‍त) हो सकते हैं ।
* इसके अतिरिक्त ‘गुलाब’के अधिक सेवनसे वमन (उल्‍टी) और सिरमें वेदनाकी समस्‍या भी हो सकती है ।
* ‘गुलाब’की पंखुडियोंका प्रयोग अच्छेसे धोकर ही करें !


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution