घरका वैद्य – प्राणायाम चिकित्सा (भाग-४)


अवधि : अनुलोम-विलोम प्राणायाम पहले दोसे तीन मिनिट करना चाहिए और कुछ समयतक इसका अभ्यास हो जानेपर इस व्यायामको प्रति दिन आधे घण्टेतक किया जा सकता है । अनुलोम-विलोमको बिना रुके तीन मिनिट या उससे अधिक समयतक निरन्तर करना हानिकारक हो सकता है, इसलिए प्राणायामके मध्य थोडा विश्राम लेना न भूलें !
अनुलोम विलोमके समय शिव संकल्प : प्राणायाम न केवल शरीर स्वस्थ बनाता है; अपितु मनको भी शुद्ध करके सकारात्मकता और आत्मविश्वास प्रदान करता है; इसलिए प्राणायामका पूर्ण रूपसे लाभ लेनेके लिए प्राणायाम करते समय सकारात्मक संकल्प लेने चाहिए । अनुलोम-विलोम करते समय श्वास भीतर भरते हुए यह संकल्प लेना चाहिए कि मेरे भीतर सकारात्मक शक्तिका संचार हो रहा है और श्वास बाहर छोडते समय यह संकल्प लेना चाहिए कि मेरे भीतर विद्यमान नकारात्मक प्रवृतियां बाहर जा रही हैं । इससे इस प्राणायामद्वारा मात्र शारीरिक स्तरपर ही नहीं; अपितु आध्यात्मिक स्तरपर भी लाभ प्राप्त होता है और शरीर सूक्ष्म काली शक्तिसे मुक्त होता है ।
अनुलोम-विलोम प्राणायामके विभिन्न लाभ : अनुलोम-विलोम प्राणायामके नियमित अभ्याससे मानव शरीरकी समस्त नाडियां शुद्ध हो जाती हैं; इसलिए इस प्राणायामको नाडी शोधन प्राणायाम भी कहा जाता है । एक मनुष्यकी देहमें ७२००० नाडियां होती हैं ।
* शरीरकी सभी नाडियां स्वस्थ और शुद्ध हो जानेसे उनमें किसी भी प्रकारका सङ्क्रमण या रोग उत्पन्न नहीं हो सकता है; इसलिए शरीर कभी रोगग्रस्त नहीं बनता है ।
* अनुलोम-विलोम प्राणायाम, मानव शरीरकी नाडियोंको शुद्ध करनेके साथ-साथ उन्हें शक्ति भी प्रदान करता है । नाडियोंके सशक्त बननेसे चिन्ता और तनाव दूर रहते हैं ।


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