घरका वैद्य – प्राणायाम चिकित्सा (भाग-५)
* प्रतिदिन प्रातः अनुलोम-विलोम प्राणायाम करनेसे शरीरमें ‘बैड कोलेस्ट्रॉल’की समस्या नहीं होती है और यदि किसी व्यक्तिको पहलेसे ही यह समस्या हो तो अनुलोम-विलोम करनेसे दूर हो जाती है ।
* अनुलोम-विलोमसे शीतप्रकोप तथा निरन्तर नाक बहनेकी समस्या और श्वसन क्रियासे सम्बन्धित कोई भी जटिल रोग हो, तो वह दूर हो जाता है ।
* गलेमें सूखी खांसी हों या गलेमें गांठ (tonsil), अनुलोम-विलोम, इन दोनों समस्याओंमें लाभदायी होता है । पेट स्वच्छ न होनेके कारण गलेमें या जीभमें कई बार कुछ लोगोंको छोटे-छोटे दाने निकल आते हों या सङ्क्रमणसे गला दुखता रहता हो या बार-बार मुखमें छाले पड जाते हों, अनुलोम-विलोम प्राणायाम इन सभी समस्याओंसे लडनेमें सहायक होता है ।
* शास्त्रोंमें अनुलोम-विलोम प्राणायामको त्रिदोषनाशक भी बताया गया है । पित्त रोग, वात रोग और गलेके कफकी समस्या, इन तीनों कष्टदायी रोगोंके विकार अनुलोम-विलोम प्राणायामके नित्य अभ्याससे दूर हो जाते हैं ।
* अनुलोम-विलोम प्राणायाम धमनियोंके अवरोधको (हार्टके ब्लॉकेजको) भी दूर कर सकता है अर्थात हृदय रोगसे पीडित व्यक्ति भी इस प्राणायामके नित्य अभ्याससे लाभ ले सकते हैं; किन्तु इसे किसी योग्य योग प्रशिक्षकके मार्गदर्शनमें करना अधिक हितकारी होगा ।
* अनुलोम-विलोम प्राणायाम मूत्रमार्गके सभी रोगोंको दूर करनेमें सहायक होता है । यदि किसी पुरुषको शुक्राणुओंकी कमी हो तो अनुलोम-विलोम व्यायामसे यह समस्या दूर हो सकती है ।
* जोडोंकी पीडा, गठिया रोग, अम्ल पित्त, शीत पित्त और कम्पवात जैसे कष्टदायक रोगोंमें भी अनुलोम-विलोम प्राणायाम लाभ प्रदान करता है । यदि रोगी इस प्राणायामको योग्य रीतिसे लम्बे समयतक करता रहे तो ऊपर बताए गए जटिल रोग जड-मूलसे समाप्त भी हो सकते हैं ।
* अनुलोम-विलोम प्राणायामसे श्वासरोग (अस्थमा) और ‘साइनस’ नामक रोग भी दूर हो सकते हैं । शरीरके स्नायुओंकी दुर्बलता दूर करनेके लिए भी अनुलोम-विलोम प्राणायाम करना उत्तम होता है ।
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