घरका वैद्य – रस चिकित्सा (भाग-४)
कर्करोग (कैंसर) : गेहूंके जवारे, द्राक्ष (अंगूर), मुनक्का, चुकन्दरका रस पिएं ! अदरकका रस वर्षभर आधा चम्मच एक कप पानीमें लेनेसे, कभी भी गलेका कर्करोग नहीं होगा । पत्तागोभी, फूलगोभी, लहसुन, ‘प्याज’, नारंगी (सन्तरा), चकोतरा, नींबूका रस अच्छी मात्रामें लें !
रोग प्रतिरोधी क्षमताके लिए : सन्तरेका रस लें !
आधे सिरमें पीडा (माइग्रेन) : एक गिलास पानीमें नींबूका रस तथा अदरकका रस मिलाकर १५ दिनोंतक लें !
मूत्र रोग : ककडीका रस ।
पेटमें छाले (पेप्टिक अल्सर) : आंतोंके घाव भरनेमें गोभीका रस बहुत प्रभावी है । प्रतिदिन लगभग ४००-५०० मिली गोभीका रस पिएं ! इसके पश्चात ककडी, पपीता और आलूका रस भी पिया जा सकता है । खट्टे फलोंके रसका सेवन न करें !
अम्लपित्त (एसिडिटी) : गोभी और गाजरका मिश्रित रस पिएं ! इसके साथ ही ककडी, सेब, मौसंबी, और तरबूजका रस लिया जा सकता है । दूधका सेवन भी करें ! तीखे-तले हुए खाद्य पदार्थों और मिठाइयोंका त्याग करें ! आलूका रस भी लाभप्रद होता है ।
मलावरोध (कब्ज) : पालक और गाजरके मिश्रित रस या आलू, ककडी और सेबके मिश्रित रसका सेवन करें ! अंजीर, बिल्व फल, अमरुद और सन्तरेका रस भी पिया जा सकता है । अंगूरका रस भी मलावरोध दूर करता है ।
उदरमें कीडे : एक गिलास गरम जलमें एक चम्मच लहसुनका रस और एक चम्मच प्याजका रस मिलाकर सेवन करें ! अनानासका रस भी उपयोगी है । साथ ही मेथी-पुदीनेका मिश्रित रस और पपीतेका रस भी पिया जा सकता है ।
हैजा : बिल्व फलका रस और पुदीना-लहसुन-प्याजका रस गरम पानीके साथ लेना चाहिए । नारियलका पानी भी बहुत उपयोगी है ।
अतिसार (दस्त) : बिल्व फल, सेब, लहसुन, और कच्ची हलदीका रस, चुकन्दरका रस तथा अनानासका रस भी पिया जा सकता है ।
भूख न लगना : प्रातः एक गिलास पानीमें एक नींबूका रस लें ! इसके उपरान्त करेले, गाजर और अदरकके रसका सेवन करें ! मलावरोध दूर करनेका उपाय भी आवश्यक है । मौसंबी, नारंगी और पपीतेका रस भी भूख बढाता है ।
नेत्रोंके लिए : गाजरका रस, विभिन्न ‘तरकारियोंका’ मिश्रित रस लें ! मीठेका सेवन कम करें !
मुहांसे : गाजर-पालकका मिश्रित रस लें ! आलू, बीट, ककडी और अंगूरका मिश्रित रस भी पिएं ! तरबूज या पपीतेका रस लें ! मुखपर पपीते या आलूके रस लगाएं ! पुदीनेके पत्ते पीसकर लगाएं और धो लें !
चर्मरोग : गाजर और पालकका मिश्रित रस पिएं ! आलू, चुकन्दर, ककडी, हलदी, तरबूज, अमरुद, सेब, मौसंबी तथा पपीतेका रस लें ! पपीते या आलूके रसको त्वचापर भी लगाया जा सकता है ।
नपुंसकता : वीर्य-वृद्धिके लिए श्वेतकन्दके (सफेद प्याजके) रसके साथ मधु लेनेपर लाभ मिलता है । श्वेतकन्दका रस, मधु (शहद), अदरकका रस और घीका मिश्रण २१ दिनोंतक निरन्तर लेनेसे नपुंसकता दूर होती है ।
खांसी : प्याजके रसमें मिश्री मिलाकर चाटनेसे लाभ होता है ।
मसूडोंकी सूजन और दांतकी वेदना : प्याजके रस और नमकका मिश्रण मसूडोंकी सूजन और दांतोंकी वेदनाको न्यून करता है ।
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