घरका वैद्य – प्राणायाम चिकित्सा – शीतली प्राणायाम (भाग-१)


शीतली  प्राणायाम दो शब्दोंसे मिलकर बना है शीतली + प्राणायाम = शीतली प्राणायाम जहांपर शीतलका अर्थ होता है ठण्डक । कहनेका अर्थ यह है कि इस प्राणायामको करनेसे शरीरको ठण्डक मिलती है; इसलिए इसे शीतली प्राणायाम कहा जाता है । इसको अंग्रेजी भाषामें ‘कूलिंग ब्रेथ’ भी कहा जाता है । यह प्राणायाम हमारे शरीरके लिए अत्यन्त उपयोगी प्राणायाम है । यह प्राणायाम एक छायादार वृक्षकी भांति है, जो प्रचुर मात्रामें प्राणवायुका (ऑक्सीजनका) निर्माण करता है । यह ग्रीष्मकालमें किया जानेवाला सबसे अच्छा प्राणायाम है ।
शीतली प्राणायामकी विधि :
१. सबसे पहले समतल भूमिपर कोई बिछौना (दरी) बिछाकर उसपर सिद्धासन, सुखासनकी अवस्थामें बैठ जाएं !
२. अब अपनी जिह्वाको बाहर निकालकर उसे मोड लें अर्थात उसे मोडकर नली (पाइप) जैसी बना लें !
३. अब इस जिह्वाके माध्यमसे लम्बी व गहरी श्वास खींचकर अपने पेटमें वायुको भर दें !
४. अब अपनी बाहर निकली हुई जिह्वाको भीतर कर लें और अपने मुखको बन्द कर लें !
५. अब अपनी ग्रीवाको (गर्दनको) आगेकी ओर झुकाकर अपने जबडेके अगले भागको वक्षसे लगा लें !
६. अब अपने श्वासको नासिकाके (नाकके) माध्यमसे बाहर निकाल दें ! ध्यान रखें कि आपको श्वास एक साथ बाहर नहीं निकालना है; अपितु धीरे-धीरे बाहर निकालना है ।
७. बस आपको ये क्रिया २०-२५ बार दोहरानी है ।


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