उद्गीथ प्राणायाम प्रत्येक आयुके व्यक्तिके लिए लाभदायक है । जब भी मनमें तनाव और उद्विग्नता अनुभव हो, तब इस प्राणायामका अभ्यास करके मन शान्त किया जा सकता है ।
★ वायुविकार (गैस), अम्लता (एसीडिटी) और उदरके (पेटके) अन्य रोग उद्गीथ प्राणायामसे दूर हो जाते हैं ।
उद्गीथ प्राणायाममें सतर्कता
★ उद्गीथ प्राणायाममें श्वासको शरीरके भीतर लेने और बाहर निकालनेकी अवधि लम्बी होनी चाहिए ।
★ किसी भी रोगी व्यक्तिको उद्गीथ प्राणायाम अभ्यास सदैव चिकित्सकके परामर्शके पश्चात योग विशेषज्ञकी देखरेखमें ही करना चाहिए ।
★ उद्गीथ प्राणायाम और भोजन करनेके मध्यमें न्यूनतम तीनसे पांच घण्टोंका अन्तर रखना चाहिए; परन्तु प्रयास करें कि उद्गीथ प्राणायामका अभ्यास प्रातःकाल और खाली पेट ही करें !
★ गर्भवती महिलाएं, श्वासके रोगी और हृदय रोगसे ग्रसित व्यक्ति उद्गीथ प्राणायाम चिकित्सकके परामर्शके पश्चात ही करें !
★ अत्यधिक कोलाहलवाले (शोरवाले) स्थानपर उद्गीथ प्राणायाम नहीं करना चाहिए । जब किसी और विषयके सम्बन्धमें सोच रहे हों, तब भी उद्गीथ प्राणायाम लाभदायक नहीं होता है ।
★ इस प्राणायामको दिनचर्याका एक कार्य समझकर हडबडीमें शीघ्रतापूर्वक समाप्त करनेपर भी कोई लाभ नहीं होता है । “ॐ कार”की शक्तिपर शंका करनेसे भी उद्गीथ प्राणायामका फल प्राप्त नहीं होता है ।
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