घरका वैद्य – प्राणायाम चिकित्सा – उज्जायी प्राणायाम (भाग-४)


उज्जायी प्राणायाम करनेकी समय व अवधि : इसका अभ्यास प्रतिदिन करनेसे अच्छे परिणाम मिलते हैं । सवेरे और सन्ध्या समय खाली पेट इस प्राणायामका अभ्यास करना अधिक फलदायी होता है । श्वास भीतर लेनेका समय प्रायः ५-७ सेकेण्ड तकका होना चाहिए और बाहर छोडनेका समय १५-२० सेकेण्डतकका होना चाहिए ।
उज्जायी प्राणायामसे होनेवाले लाभ :
रोगोंमें लाभप्रद : इस प्राणायामके नियमित अभ्याससे कफ रोग, अजीर्ण, वातकी (गैसकी)  समस्या दूर होती है ।
हृदय रोगमें : उज्जायी प्राणायामके अभ्याससे हम हृदयके अधिकतर रोगोंको नष्ट कर सकते हैं ।
श्वास एवं ‘साइनस’ रोगमें : उज्जायी प्राणायाम श्वास रोग और साइनसमें भी लाभदायक होता है ।
कुण्डलिनी शक्ति : उज्जायी प्राणायाम कुण्डलिनी शक्तिको जाग्रत करनेमें सहयोग करता है ।
अवटु अल्पक्रियता या जडमानवतामें लाभदायक : अवटु अल्पक्रियतासे (Hypothyroidism) पीडित व्यक्तियोंके लिए उज्जायी प्राणायाम बहुत ही लाभदायक है ।
खर्राटे न्यून करनेमें : उज्जायी प्राणायामके नियमित अभ्याससे खर्राटोंकी समस्यामें लाभ मिलता है ।
श्वासरोग (दमा) और क्षय रोगमें लाभप्रद : उज्जायी प्राणायाम करनेसे ‘दमा’ और क्षयरोगसे (टी.बी.से) पीडित रोगियोंको लाभ मिलता है ।
दूषित पदार्थ निकालनेमें : उज्जायी प्राणायामसे शरीरके दूषित पदार्थ बाहर निकलते हैं और इसलिए यह युवपीडकोंसे (मुंहासोंसे) पीडित व्यक्तियोंके लिए भी उपयोगी है ।
पेटकी वसा घटानेमें : उज्जायी प्राणायाम पेटकी वसाको (चर्बीको) घटानेमें सहायता करता है ।
पीठकी वेदनामें : पीठकी वेदनासे व्यथित व्यक्तियोंकेलिए ये प्राणायाम बहुत ही सहायक है ।
मनको करे शान्त : उज्जायी प्राणायामके नियमित अभ्याससे मानसिक तनाव दूर होकर मन शान्त होता है ।


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