कल हमने गिलोयसे होनेवाले लाभोंके विषयमें बताया था । आज हम इससे होनेवाले कुछ अन्य लाभों व इसके प्रयोगमें लेनेवाली सावधानियोंके विषयमें बताएंगें –
* मानसिक उन्माद (पागलपन) – गिलोयके काढेको ब्राह्मीके साथ पीनेसे उन्माद या पागलपन दूर हो जाता है । गिलोयको ‘अडाप्टोजेनिक’ (औषधीय घटक) औषधिके रूपमें प्रयोग किया जा सकता है, यह मानसिक तनाव और चिन्ताको अल्प करती है । यह स्मृतिका विकास करने और कार्यपर ध्यान लगानेमें सहायता करती है । यह मस्तिष्कसे सभी विषाक्त पदार्थोंको भी बाहर कर सकती है । गिलोयकी जड और पुष्पसे तैयार ५ मिलीलीटर गिलोयके रसका नियमित सेवन एक उत्कृष्ट मस्तिष्क औषधिके रूपमें समझा जाता है । गिलोयको प्रायः एक वृद्धावस्था विरोधी औषधि सम्बोधित किया जाता है ।
* मधुमेह – गिलोयमें ‘हाइपोग्लिसीमिक’ अर्थात शर्करा अल्प करनेवाले गुण पाए जाते हैं । यह रक्तचाप और ‘लिपिड’के स्तरको अल्प कर सकता है । गिलोयका नियमित सेवन द्वितीय स्तरके मधुमेह रोगियोंके लिए विशेष रूपसे लाभप्रद होता है । नित्य गिलोयका रस पीनेसे रक्त शर्कराका स्तर गिरता है ।
* गठियामें – गिलोयके प्रज्वलनरोधी और गठियारोधी गुण न केवल गठियाको अल्प करनेमें सहायक हैं, वरन यह उसके लक्षण जैसे वेदना, सूजन, जोडोंमें वेदना आदिसे भी बचाए रखते हैं । यदि कोई वातरोगी गठियासे पीडित है तो गिलोयका सेवन अवश्य ही करना चाहिए । गठियाकी चिकित्साके लिए, यह शुद्ध घीके साथ भी प्रयोग किया जाता है, ‘रुमेटी गठिया’की चिकित्सा करनेके लिए अदरकके साथ इसका प्रयोग किया जा सकता है ।
गिलोयके तनेसे बनाए गए चूर्णको दूधमें मिलाकर पीनेसे गठियाके रोगियोंको अत्यधिक लाभ मिलता है ।
* पौरुष शक्ति – गिलोय, बडा गोखरू और आंवला सभी समान मात्रामें लेकर पीसकर चूर्ण बना लें । इसमेंसे ५ ग्राम चूर्ण प्रतिदिन मिश्री और शुद्ध घीके साथ सेवन करनेसे पौरूष शक्तिमें वृद्धि होती है ।
* रक्त कर्करोग (ब्लड कैंसर) – इस रोगसे पीडित रोगीको गिलोयके रसमें जवाखार मिलाकर सेवन करानेसे उसका रोग ठीक हो जाता है । लगभग २ फुट लम्बी गिलोयमें, १० ग्राम गेहूंकी हरी पत्तियां लेकर, थोडासा जल मिलाकर पीस लें, तदोपरान्त इसे वस्त्रमें रखकर निचोडकर रस निकाल लें । इस रसकी एक कपकी मात्रा प्रातःकाल भोजन किए बिना ही सेवन करें तो इससे लाभ मिलेगा ।
* जीर्णज्वर (पुराने बुखार) – जीर्ण ज्वर या ६ दिवससे भी अधिक समयसे आ रहे ज्वर व न ठीक होनेवाले ज्वरकी अवस्थामें उपचार करनेके लिए ४० ग्राम गिलोयको अच्छी प्रकारसे पीसकर, मिट्टीके पात्रमें २५० मिलीलीटर जलमें मिलाकर रातभर ढककर रख दें और प्रातःकाल इसे मसलकर छानकर पी लें । इस रसको प्रतिदिन दिनमें ३ बार लगभग २० ग्रामकी मात्रामें पीनेसे लाभ मिलता है । २० मिलीलीटर गिलोयके रसमें १ ग्राम पिप्पली तथा १ चम्मच मधु (शहद) मिलाकर प्रातःकाल व संध्यामें सेवन करनेसे जीर्णज्वर, कफ, प्लीहारोग (तिल्ली), खांसी और अरुचि (भोजनका अच्छा न लगना) आदि रोग ठीक हो जाते हैं ।
बच्चोंके लिए सेवन – गिलोय पांच वर्षकी आयु या इससे ऊपरके बच्चोंके लिए सुरक्षित है, यद्यपि गिलोय दो सप्ताहसे अधिक या बिना आयुर्वेदिक चिकित्सकके परामर्शके नहीं दी जानी चाहिए ।
सावधानियां –
१. यदि आप मधुमेहकी औषधि ले रहे हैं तो बिना चिकित्सकके परामर्शके गिलोयका सेवन नहीं करना है, क्योंकि यह भी वही कार्य करती है ।
२. गर्भवती और स्तनपान करवानेवाली महिलाओंके लिए भी गिलोयका प्रयोग वर्जित है ।
३. गिलोयको शल्यचिकित्साके (सर्जरीके) पश्चात प्रयोग नहीं करना चाहिए ।
४. यदि उदरकी समस्या है तो गिलोयका प्रयोग न करें; क्योंकि इसके कारण अपच हो सकता है । अपचकी समस्या होनेपर इसका किसी भी प्रकारसे प्रयोग न करें । इसके कारण उदरमें वेदना व मरोड हो सकती है ।
५. रोग प्रतिरोधकता (इम्यूनिटी) बहुत अधिक सक्रिय हो जाए तो भी ठीक नहीं होता है, क्योंकि इस स्थितिमें स्व-प्रतिरक्षित (ऑटोइम्यून) रोगोंके होनेका संकट बढ जाता है अर्थात इसके अधिक प्रयोगसे ‘ल्यूपस’, ‘मल्टीपल स्क्लेरोसिस’ और ‘रूमेटाइड अर्थराइटिस’ जैसे रोग हो सकते हैं ।
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