उन्होंने स्वयं कहा था कि वे गोमांस खाते हैं और उसे प्रतिबंधित नहीं करना चाहिए; क्योंकि उसे और भी पंथोंके लोग खाते हैं ! वह बंगलुरु विमानपत्तनस्थलका (हवाईअड्डाका) नाम भी परिवर्तित कर, जिहादी प्रवृत्तिके एवं लाखों हिन्दुओंके हत्यारे, टीपू सुल्तानके नामपर करना चाहता थे । उन्होंने स्वयंके हाथमें ‘मी टू अर्बन नक्सल’का फलक लिखकर सामाजिक जालस्थलपर ‘अर्बन नक्सलवाद’का समर्थन किया था ! क्या ऐसे हिन्दूद्रोही और राष्ट्रद्रोहीको देशके जो सर्वोच्च सम्मान दिए गए हैं, वह दिया जाना चाहिए था ? ऐसे लोगोंके देहांतपर शोक कैसा ? जो न धर्मका हो सका, न गो माताका न राष्ट्रका, उसके देहांतसे तो इस पृथ्वीका भू-भार ही हल्का हुआ है ! हिन्दू राष्ट्रमें ऐसे कलाकारोंके लिए समाजमें कोई स्थान नहीं होगा और उन्हें राष्ट्रीय स्तरके सम्मान देना तो बहुत दूरकी बात है !
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