अप्रैल २१, २०१९
पटनासे एक अचम्भित करनेवाला समाचार सामने आया है । नगरके बुद्धा कॉलोनी क्षेत्रमें स्थित ‘क्वालिटी एन्क्लेव अपार्टमेंट’ परिसरमें एक छात्रा अधमरी मिली । उसके शरीरपर घावके कई निशान थे । उसके जांघकी अस्थियां भी टूटी हुई थी । उसके हाथ, कलाई, पीठ और ललाटपर गहरी चोट और खरोंचके निशान थे । रक्तरंजित अवस्थामें तडपती मिली छात्राको चिकित्साके लिए बादमें पीएमसीएच ले जाया गया, जहां उसकी मृत्यु हो गई । स्थानीय लोगोंका मानना है कि पीडिताके साथ पहले दुष्कर्म किया गया, विरोध करनेपर पीटा गया और छतसे फेंक दिया गया । छात्रा अपनी सहेली यूनिशके घर गई थी । पुलिस यूनिशके भाई बोया व एक अन्य युवकको बन्दी बनाकर पूछताछ कर रही है ।
पूरे घटनाक्रमकी जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार, छात्रा कविता (परिवर्तित नाम) और यूनिश सहेलियां थीं । यूनिशको वो कई दिनोंसे जानती थी । यूनिशका ईसाई परिवार पहले भी लोगोंका धर्म परिवर्तन कराता रहा है । आसपासके लोगोंसे इस परिवारका व्यवहार सही नहीं है । स्थानीय लोगोंने बताया कि चीन कोठीकी रहनेवाली एक लडकीकी इस परिवारने सहायता की थी और बदलेमें उसका धर्म परिवर्तन करा लिया था । इतना ही नहीं, उस लडकीका विवाह एक ऐसे ईसाई लडकेसे करा दिया था, जो उसे गर्भवतीकर छोड गया था ।
घटनाकी रात कविता (परिवर्तित नाम) यूनिशके बुलानेपर उसके घरमें गई थी । यूनिशसे प्रभावित होकर उक्त छात्राने भी अपना धर्म परिवर्तित कर लिया था । रात २ बजे यूनिशने छात्राको अपने पिताके चिकित्सालयमें प्रविष्ट होनेकी बात कह अपने घर बुलाया था । उसने अकेले होने और भयकी बात कहकर उसे घर बुलाया और कहा कि उसका भाई उसे पुनः वापस उसके घर छोड देगा ।
सीसीटीवीके अनुसार, रातके ढाई बजे छात्राको द्वार पारकर ‘अपार्टमेंट’में घुसते हुए देखा गया । वहां एक युवक उसे सहारा दे रहा था ।
इसके पश्चात डस्टर वाहनसे चार लडके आए थे । पीडिताका भाई भी अपने बहनकी वहां होनेकी सूचना मिलनेपर अपार्टमेंटमें पहुंचा; परन्तु गार्डने उसे भीतर नहीं जाने दिया । थोडे समय पश्चात किसीके गिरनेकी आवाज आई । जब उसका भाई भीतर घुसा तो उसने देखा कि उसकी बहन भूमिपर पडी तडप रही है । जब कोई भी सहायताके लिए सामने नहीं आया तो भाई अपनी अधमरी बहनको कंधेपर उठाकर अपार्टमेंटसे बाहर लाया ।
लौगोंकी सहायतासे पीडिताको चिकित्सालय पहुंचाया गया, जहां उसने प्राण त्याग दिए । घटनाके पश्चात अनियन्त्रित भीडने अपार्टमेंटके बाहर व भीतर घुसकर तोडफोड की और पुलिस मूकदर्शक बनी रही ।
यूनिशकी मां संस्था चलाती है । ये परिवार मिजोरमका रहने वाला है । यूनिशकी सदनिकासे (फ्लैटसे) छात्राका दुपट्टा मिला है । उसका भ्रमणभाष छतपर पडा था तो चप्पल सीढियोंपर पडे मिले । गार्ड कक्षमें भी रक्तके निशान मिले । अबतक पुलिस किसी अन्तिम परिणामपर नहीं पहुंची है । पीडिताके भाईने रातको यूनिशके भ्रमणभाषपर फोन भी किया था । यूनिशने कहा था कि खुशबू उसके साथ है और दोनों पढ रही हैं; परन्तु छात्रासे उसके भाईकी बात नहीं कराई थी । तभी उसके भाईको शंका हो गई थी ।
“पुलिस अभीतक अन्तिम परिणामपर नहीं पहुंची है, यह लज्जाजनक है । क्या इस प्रकरणमें भी किसी प्रमाण की आवयकता है ? और यह प्रश्न हम हिन्दुओंको भी सोचनेपर विवश करता है कि क्या ये धर्मान्तरण करनेवाले ईसाई हमारे समाजका अंग बनने योग्य है ? शासन अन्धा है; परन्तु हम तो अपना अच्छा बुरा स्वयं सोच सकते हैं और छात्राको धर्म परिवर्तन करनेसे उसके घरवालोंने रोका क्यों नहीं ? स्पष्ट है कि घरवाले मुक्त विचारोंके होंगें तभी नहीं रोका; अन्यथा इतनी रातको कौन अपनी पुत्रीको बाहर जाने देता है, या घरमें कोई भी नहीं था या छात्रा बिना बताए ही निकल गई ? ये सभी बातें स्पष्ट करती हैं कि ईसाई अपना कर्त्तव्य निभा रहा है, जो गिरिजाघरोंके कहनेपर धर्मान्तरण कर रहा है और जिहादियोंकी भांति हिन्दू युवतियोंसे दुष्कर्म करके उन्हें फंसा रहा है, मूढ तो हिन्दू ही है, जो भाईचारेका राग अलापता है और अन्तमें भोगता है । इस छात्राकी मृत्युके उत्तरदायी जितना ईसाई युवक है, उतने ही उसके माता-पिता भी है । हिन्दू माता-पिता ऐसे प्रकरणको नेत्र खोलकर देखें और गांठ बांधकर रखें कि धर्म पालन करना आवश्यक है । यदि युवतीके माता-पिता धर्मनिष्ठ होते तो आज वह जीवित होती !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
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