केश काटनेवाले विवाहित इमरानने आशाको छद्म प्रेमजालमें फंसाया, ‘पोल खुली’ तो मार दी ‘गोली’ : उत्तर प्रदेश ‘पुलिस’ने ‘दबोचा’


०५ जून, २०२२
      उत्तर प्रदेशके बदायूं जनपदमें एक मुसलमान युवकने हिन्दू समुदायकी लडकीको ‘गोली’ मार दी । ‘मीडिया’ विवरणके अनुसार, आरोपितका नाम इमरान और पीडिताका नाम आशा बताया जा रहा है । इस घटनाके कारण आशाके आगे इमरानके विवाहित होनेकी ‘पोल खुलना’ बताया जा रहा है । पीडितापर आक्रमणमें इमरान और उसके एक अन्य साथी जीशानको आरोपित बनाया गया है । ‘पुलिस’ने दोनों आरोपितोंको बन्दी बनाकर कारागृह भेज दिया है । घटना गुरुवारकी (२ जून २०२२ की) है ।
      ‘मीडिया’ विवरणके अनुसार, पीडिता मूल रूपसे उत्तर प्रदेशके अमेठी जनपदकी निवासी है । यहांके गांव गोदनाके रहनेवाले राममिलन हरियाणाके गुरुग्राममें कार्य करते हैं । उनकी १८ वर्षकी बेटी आशा भी उनके साथ रहती है । आशा घरोंमें खाना बनानेका कार्य करती थी । गुरुग्रामके ही हुड्डा हाटमें (बाजारमें) बदायूंके इस्लामनगर कुंदावालीका रहनेवाला इमरान एक ‘सैलून’पर कार्य करता था । आशा और इमरानकी गुरुग्राममें भेंट हुई और कुछ समय पश्चात ये भेंट प्रेममें परिवर्तित हो गई ।
      बुधवारको इमरानने आशाको बदायूं चलनेके लिए कहा जिसपर आशा ‘तैयार’ हो गई । बदायूंमें इमरानको लेनेके लिए उसका साथी जीशान ‘बाइक’से आया । उसने इमरान और आशाको ‘बाइक’पर बिठा लिया । कुछ दूर आगे चलकर ‘सुनसान’में जीशानने ‘बाइक’ रोक दी और आशाको ‘मारना-पीटना’ आरम्भ कर दिया । जब आशाने इसका विरोध किया तब इमरानने जीशानसे एक ‘तमंचा’ लेकर आशापर ‘तान’ दिया ।
      बताया जा रहा है कि ‘तमंचे’को देखते ही आशा भयभीत होकर भागने लगी । इसी मध्य इमरानने उसपर ‘गोली’ चला दी । इमरानकी चलाई ‘गोली’ आशाके मस्तकको छूते हुए निकल गई; किन्तु इससे वह चोटिल हो गई । भागनेके मध्य बदायूं-बिजनौर मार्गपर पडनेवाले नट बाबा मन्दिरके पास मूर्छित हो गई । यात्रियोंने ‘पुलिस’को जानकारी दी, जिसके पश्चात ‘पुलिस’ने आशाको चिकित्सालय पहुंचाया । आशाका स्वास्थ्य अब ठीक है । आशाको उनके घर भेज दिया गया है । शनिवारको (४ जून २०२२ को) ‘पुलिस’ने दोनों आरोपितोंको बन्दी बनाते हुए आक्रमणमें प्रयोग हुआ ‘तमंचा’ भी प्राप्त कर लिया है ।
      जिहादियोंका लक्ष्य है कि ‘लव-जिहाद’ करके अपनी जनसंख्या वृद्धि करना और हिन्दू लगा है उदर पालनमें ! धर्म शिक्षणके अभावमें हिन्दुओंका पतन हो रहा है; अतः रोटीके साथ-साथ अब बेटीपर भी ध्यान दिया जाना चाहिए और इस हेतु धर्मशिक्षण अतिआवश्यक है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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