शुक्रवारकी ‘नमाज’के पश्चात हिंसाचारके पीछे ओवैसी, ‘पी.एफ.आइ.’ एवं ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ ! – ‘जमियत-उलेमा-ए-हिंद’का आरोप


१३ जून, २०२२
       नूपुर शर्माके विरोधमें देशमें शुक्रवारकी ‘नमाज’के उपरान्त मुसलमानोंद्वारा हुए ‘हिंसाचार’के पीछे ‘एम.आई.एम.’के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी, ‘पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ (पी.एफ.आई.) एवं ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ है, ऐसा आरोप ‘जमियत-उलमा-ए-हिंद’ नामक मुसलमानोंके संगठनद्वारा यहां एक कार्यक्रममें किया गया । इसके साथ ही इस संगठनने आवाहन किया है कि मुसलमान भी उदार मनसे नूपुर शर्माको क्षमा कर दे ।
      ‘जमियत-उलमा-ए हिंद’ने कहा, “भारतका वातावरण बिगाडनेका षड्यन्त्र देश एवं विदेशोंसे रचा जाता है । उसे उजागरकर देशमें शान्तिका निर्माण करनेके लिए ‘जमियत’ देशमें अभियान चलानेवाला है । इसके साथ ही ‘फतवा’ भी निकालनेवाले हैं । इस ‘हिंसाचार’के पीछे जो हैं, उनका नाम हम उजागर करेंगे ।’’
      ‘जमियत’के अध्यक्ष ‘मौलाना’ सोहैब कासमी बोले, “इस घटनाके विषयमें मुहम्मद ‘पैगम्बर’की नीति क्या होती ?, इसका विचारकर हमें निर्णय लेना चाहिए । नूपुरने क्षमा मांगी है । उन्हें क्षमा करना चाहिए । इस्लामकी खरी सीख यही है । इस प्रकरणमें हाथमें ‘कानून’ लेनेसे स्वयंको रोकना चाहिए । मुसलमानोंको न्यायालयपर विश्वास रखना चाहिए । ‘सिर तन से जुदा’ (सिर धडसे अलग करो) यह इस्लामकी घोषणा नहीं है । भारतके मुसलमानोंको पाकिस्तानके मूढ ‘मौलवियों’द्वारा बनाई गई ऐसी घोषणाओंसे दूर रहना चाहिए । ‘हिंसाचार’के प्रकरणमें ‘पुलिस’ कार्यवाही कर रही है; परन्तु ‘हिंसाचार’का षड्यन्त्र रचनेवालोंपर कार्यवाही करनी चाहिए । वे स्वार्थके लिए मुसलमान तरुणोंका जीवन नष्ट कर रहे हैं । इस्लाम एवं देशकी छवि धूमिल कर रहे हैं । अयोध्यामें श्रीराममन्दिर, नागरिकत्व सुधार विधेयक आदिके समय मुसलमानोंको दिशाभ्रम किया गया । ‘इस्लाम संकटमें है’, ऐसा कहकर उन्हें उकसाया गया । अब भी वही किया जा रहा है ।
        गत दिनों कुछ राज्योंमें एक ही समय ‘नमाज’के पश्चात जो उपद्रव हुआ, वह एक योजनाबद्ध प्रकारसे किया गया षड्यन्त्र था । ‘जमियत-उलेमा-ए-हिंद’का आरोप तर्कसंगत है । इसमें जो भी दल और नेता सम्मिलित है, उन सभीके विरुद्ध कठोर कार्यवाही होनी चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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