महिलाओंपर टिप्पणीके प्रकरणमें अब नरसिंहानंद हरिद्वारमें बनाए गए बन्दी, जितेंद्र त्यागीको मुक्त कराने हेतु कर रहे थे अनशन


१६ जनवरी, २०२२
              जूना अखाडेके महामण्डलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरीको उत्तराखंड ‘पुलिस’ने हरिद्वारमें बन्दी बना लिया है । वह सर्वानंद घाटपर जितेंद्र नारायण त्यागीको बन्दी बनाए जानेके विरोधमें अनशनपर बैठे थे । नरसिंहानन्दके बन्दी बनाए जानेकी पुष्टि उत्तराखंड ‘पुलिस’ने की है । उन्हें १५ जनवरीको रात्रिमें लगभग ९ बजे ‘पुलिस’ने अपनी अभिरक्षामें लिया है । उत्तराखंड ‘पुलिस’के अनुसार, हरिद्वार धर्मसंसदमें कथित ‘हेट स्पीच’की जांच ‘एसआईटी’द्वारा कराई जा रही है ‌व प्रकरणमें ५ लोगोंको चिह्नित भी किया गया है । वहीं कुछ समाचार ‘चैनलों’द्वारा पांच लोगोंको बन्दी बनाए जानेकी बात भी बताई जा रही है, जिसे ‘पुलिस’ने असत्य बताया हैं । हरिद्वार ‘पुलिस’के प्रवक्ताका कहना है कि यति नरसिंहानंद बारम्बार अपराधोंको दोहरा रहे थे; इसलिए उनपर नियमानुसार विधिक कार्यवाही की गई है । ‘पुलिस’ प्रवक्ताके अनुसार कुछ दिवस पूर्व ही उन्होंने विशेष महिलाओंके विरुद्ध अभद्र शब्दोंका प्रयोग किया था । वहीं उनके बन्दी बनाए जानेकी सूचनापर उनके अनेक समर्थक हरिद्वार ‘कोतवाली’के समक्ष एकत्रित हो गए, जिन्हें ‘पुलिस’ने बल प्रयोगकर हटाया । उधर जितेंद्र नारायण त्यागीको प्रतिभूति (जमानत) नहीं मिली है । इस सूचनाकी जानकारीको नरसिंहानंद गिरिने अपने ‘फेसबुक’ खातेके माध्यमसे बन्दी बनाए जानेसे पूर्व साझा किया था ।
      कहां समुदाय विशेषके राजनेताद्वारा हिन्दुओंके विमुख कितना भी विष उगले जाए, उन्हें न्याय व्यवस्था स्पर्श भी नहीं करती । वहीं यदि किसी साधु-सन्तने समुदाय विशेषपर अंगुली भी उठाई तो वह असंवैधानिक सिद्ध हो जाता है व त्वरित कार्यवाही भी आरम्भ हो जाती है । इसका प्रमुख कारण है हिन्दुओंमें संगठन एवं जनजाग्रतिका अभाव । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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