कुछ व्यक्ति हमारे साधकोंसे पूछते हैं कि आपने ‘जागृत भव’ जो हमारे व्हाट्सऐप्प गुटका नाम है, उसे अंग्रेजीमें क्यों लिखते हैं, उसे हिंदी भाषामें लिखें, यह सात्त्विक कृत्य होगा !
हिन्दू धर्म मात्र सात्त्विक रहना ही नहीं सिखाता अपितु वह त्रिगुणातीत होना सिखाता है ! हम धर्मकी शिक्षा दे रहे हैं, तो मात्र सात्त्विक रहना ही नहीं सिखाते हैं अपितु योग्य पात्र, त्रिगुणातीतकी ओर कैसे बढें ?, इसकी भी उन्हें दिशा देते हैं; क्योंकि हमारे श्रीगुरुने भी हमारे साथ ऐसा ही किया है ! अतः हम कोई तमोगुणी कृत्य कैसे कर सकते हैं ? यदि ऐसा कुछ करते हैं तो उसके पीछे कुछ कारण होता है ! हमारे व्हाट्सऐप्प गुटमें श्रव्य सत्संग भी प्रसारित होता है, ऐसे भी कुछ लोग होते हैं जिन्हें हिंदी नहीं आती है, अनेक बार वे विदेशसे होते हैं या दक्षिण भारतसे होते हैं और उन्हें हिंदी लिखना या पढना नहीं आता है, किन्तु वे हिंदी समझ सकते हैं; इसलिए वे मात्र सत्संग सुनने हेतु या हिन्दू वार्ता सुनने हेतु हमारे गुटोंसे जुडते हैं | हिन्दू धर्म संकीर्णता नहीं अपितु व्यापकताकी सीख देता है , हम मात्र हिंदी भाषिक नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्वका विचारकर, उसे अंग्रेजी भाषामें लिखते हैं ! कहां कट्टरता रखनी चाहिए और कहां नहीं, इस हेतु विवेकका उपयोग करना अति आवश्यक होता है ! हिन्दू धर्मका प्रसार सर्वत्र हो, इस हेतु हमें ऐसे निर्णय लेने पडते हैं !
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