कुछ पाठक जानना चाहते हैं कि धर्म अधिष्ठित (धर्म निरपेक्ष नहीं अपितु धर्म सापेक्ष ) राज्य प्रणालीका क्या अर्थ है ?
इस राज्य प्रणालीमें राज्यकर्ता खरे अर्थोंमें धर्माचरण करनेवाला क्षत्रिय (जन्म क्षत्रिय बल्कि कर्म क्षत्रिय) होगा वह ब्राह्मणके (आत्मज्ञानी संत) मार्गदर्शनमें राज्यपर शासन करेगा और ऐसी राज्य प्रणालीमें प्रजा सुखी और धर्मका अवल्मबन करनेवाली होगी । -तनुजा ठाकुर
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