अनेक व्यक्तिको लगता है कि आज कि प्रजातांत्रिक भ्रष्ट एवं धर्मनिरपेक्ष व्यवस्थामें हिन्दु राष्ट्रकी स्थापना कैसे हो सकती है ?


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हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना संतोंके संकल्पसे होगा । संतोंके मनमें आए इस इच्छाको साधक प्रवृत्तिके साधक जीव उसे ग्रहण कर, उनसे मार्गदर्शन लेकर और उन्हीं संतोंके कृपाके कारण स्थापित कर पाएंगे। हिन्दु राष्ट्रकी स्थापना हेतु हम सभी धर्मनिष्ठ और कर्तव्यनिष्ठ साधकोंको संतोंके मार्गदर्शनमें प्रयास करना होगा क्योंकि अभी तक अनेक हिंदुत्वनिष्ठ संस्थाएं बिना किसी संतके योग्य मार्गदर्शनमें हिन्दु राष्ट्रकी स्थापना हेतु प्रयास रत रही है; परंतु उन्हें यश नहीं मिला है क्योंकि आजकलके कालमें हिंदुत्वका क्षरण करेनवाले अधिकांश दुर्जन प्रवृत्तिके धर्मद्रोहियों और राष्ट्रद्रोहियोंके सूक्ष्म डोर सूक्ष्म जगतकी अति बलाढ़्य आसुरी शक्तिसे बंधी है मात्र उच्च कोटिके ब्राह्मतेजयुक्त संत ही दुर्जनोंकी उस मूल डोरको सूक्ष्म जगतके मंत्रिकोंसे काट कर उन्हें नष्ट कर सकते हैं और उसके पश्चात सभी दुर्जन बलहीन हो जाएंंगे और ऐसी स्थितिमें दुर्जनोंको दंड देना सरल हो जाएगा और साधक प्रवृत्तिके राज्यकर्ताको सत्ता सरलतासे प्राप्त हो जाएंगा, अतः सभी साधकोंको मिलकर संतके संरक्षणमें हिन्दु राष्ट्रकी स्थापना हेतु क्रियाशील होना पडेगा -तनुजा ठाकुर



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