निम्नलिखित सुवचनसे सम्बंधित घटनाका संक्षिप्त विवरण सर्वप्रथम देती हूं । शिवाजी महाराजकी सेनामें तानाजी मालुसरे नामक वीर सेनापति थे । उन्हें उनके पुत्र रायबाके विवाह अवसरपर कोंडाणा दुर्ग (किला) जीतनेका आदेश मिला था । उनके उद्गार थे, “पहले विवाह कोन्डानेकी, तत्पश्चात् रायबाकी !” इस किलेको जीतते हुए वे वीरगतिको प्राप्त हुए थे । शिवाजी महाराजने इस घटनाके पश्चात् कहा था “गढ आला, पण सिंह गेला” ! अर्थात् गढ (किला) आया; परन्तु सिंह गया ! मालुसरेजीके सम्मानमें शिवाजी महाराजने उस किलेका नामकरण सिंहगढ किया जो आज पूनामें स्थित है । – तनुजा ठाकुर
“पहले शादी कोंडाणाकी, तत्पश्चात् रायबाकी”, तानाजी मालुसरेका यह उद्गार प्रत्येक
हिन्दूको स्मरण रख उसे कृतिमें लाना चाहिए ! ऐसा करनेपर ही हिन्दू राष्ट्र रुपी
सिंहगढ जीतना अर्थात् हिन्दु राष्ट्रकी स्थापना करना सम्भव होगा !” – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले (१५.११.२०१३)