जबसे इस देशके क्षत्रियोंने अहिंसाका पाठ पढा है (बौद्ध कालसे यह आरम्भ हुआ) तबसे बाह्य आक्रमणकारियोंकी इस देशपर प्रभुत्व करनेकी इच्छा बलवती होती चली गई और अनेक शतकोंसे इस राष्ट्रपर कोई न कोई राज करता आ रहा है और आज तो भ्रष्ट, आपराधिक और सत्तालोलुप राज्यकर्ताओंने इस देशकी आन्तरिक और बाह्य दोनों ही सुरक्षाको संकटमें डाल दिया है । – तनुजा ठाकुर
हम क्षत्रिय पुन: अपना शिरोदान करने हेतु प्रस्तुत हैँ