स्वतन्त्रताके पश्चातसे ही पाकिस्तानके अनेक भारतविरोधी दुष्कृत्योंके प्रत्यक्ष एवं परोक्ष प्रमाण मिलनेपर भी उसके विरुद्ध कोई ठोस कार्यवाही नहीं करनेवाले निष्क्रिय राज्यकर्ता, इस देशको क्या कभी बाह्य आक्रमणोंसे सभी नागरिकोंको सुरक्षा दे पाएंगे ?
उसीप्रकार नक्सलवादियोंके अमानवीय आक्रमणोंसे भारतको मुक्त नहीं कर पानेवाले अकर्मण्य राज्यकर्ता, क्या कभी देशमें आन्तरिक शान्ति और स्थिरता ला पाएंगे ? अर्थात भारतीय प्रजातान्त्रिक व्यवस्था बाह्य एवं आन्तरिक दोनों ही स्तरोंपर ही इस देशकी प्रजाको सुरक्षित रखनेमें असक्षम रही है, यही स्वतन्त्रताके पश्चातकी घटनाएं हमें चीख-चीख कर बता रही हैं । इस स्थितिको परिवर्तित करने हेतु हिन्दू राष्ट्र ही चाहिए, जहां भारतके सभी शत्रु राष्ट्रके कुकृत्योंपर एवं इस देशमें आन्तरिक अस्थिरता उत्पन्न करनेवालोंको मुंहतोड उत्तर देनेवाले राष्ट्राभिमानसे ओत-प्रोत राज्यकर्ता होंगे एवं प्रजा सुखी तथा बाह्य एवं आन्तरिक आघातोंसे भी सुरक्षित होगी ।
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