स्वतन्त्रता प्रश्चात प्रतिवर्ष लाखों हिन्दुओंका अहिंदू पंथोंमें धर्मांतरण हो रहा है, ऐसा तो मुगलों और अंग्रेजोंके शासनकालमें भी हुआ करता था ! इस स्थितिसे निपटनेमें निधर्मी लोकतन्त्र पूर्णत: असमर्थ है, यह स्पष्ट हो चुका है; अतः हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना ही ऐसे सभी समस्याओंका एकमात्र समाधान है !
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